Chhattisgarh Liquor News: अब प्लास्टिक की बोतलों में मिलेगी शराब? छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन ने जताया विरोध और चिंता

रायपुर: छत्तीसगढ़ में अभी तक कांच की बोतल में शराब की बिक्री हो रही थी. सरकार ने नई शराब नीति लागू करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब शराब की पैकिंग कांच की बोतल की बजाय प्लास्टिक की बोतल में होगी. सरकार का कहना है कि यह बदलाव शराब की बिक्री को और सुविधाजनक बनाएगा.
15 लाख परिवारों पर असर
इस फैसले से पूरे प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15 लाख परिवार प्रभावित होंगे. खासतौर पर वे लोग जिन्हें कांच की बोतल रीसाइकल करने का काम है या जो कचरे से बोतल इकट्ठा करके कुछ पैसे कमाते हैं, उन्हें नुकसान होगा.
छोटे कारोबारियों की चिंता
इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन ने मीडिया से बात की. एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संदीप गुप्ता ने कहा कि यह नीति छोटे और गरीब लोगों की रोज़ी-रोटी छीन सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि कांच की बोतल पर व्यापारी तीन बार GST देते हैं, जिससे सरकार को राजस्व भी मिलता है. अगर प्लास्टिक की बोतल में पैकिंग शुरू होती है, तो सरकार GST से भी वंचित हो सकती है.
देश के प्रधानमंत्री की सोच देश को प्लास्टिक मुक्त करना है. बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में नई शराब नीति के तहत प्लास्टिक की बोतल में पैक की जाएगी. ऐसे में सरकार इस निर्णय को वापस ले.- संदीप गुप्ता, उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर
अध्यक्ष मनोज मलिक ने बताया कि प्लास्टिक की बोतल में शराब पैकिंग से पर्यावरण को नुकसान होगा और गर्मी में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और शराब दोनों ही शरीर के लिए हानिकारक हैं.
प्लास्टिक वैसे भी जहर का काम करता है और शराब भी जहर हैं. प्लास्टिक की बोतल में शराब का पैकिंग होता है तो वह कुछ दिनों में शराब का टेस्ट बदल जाएगा. जो हानिकारक हो सकता है– मनोज मलिक, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ बॉटलिंग एसोसिएशन
अवैध कारोबार का खतरा
मनोज मलिक ने चेतावनी दी कि प्लास्टिक की बोतल में शराब पैकिंग होने से अवैध शराब कारोबार बढ़ सकता है. इसका सीधे फायदा सिर्फ डिस्टिलरी को होगा.
आंदोलन और हाईकोर्ट की संभावना
एसोसिएशन ने कहा कि अगर सरकार 10 दिन के भीतर अपना निर्णय वापस नहीं लेती है, तो वे आंदोलन करेंगे और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर करेंगे.
दावा है कि छत्तीसगढ़ में नई शराब नीति से केवल डिस्टिलरी को फायदा होगा, लेकिन छोटे कारोबारी, गरीब लोग और पर्यावरण इस फैसले से प्रभावित होंगे. बॉटलिंग एसोसिएशन सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की अपील कर रहा है.





