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अगले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि, सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है. विशेषज्ञों ने कहा कि निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आंकड़ों जैसे महंगाई, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर खास नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापारी संभावित ब्याज दरों में कटौती का समय और गति समझने के लिए अमेरिका के श्रम संबंधी आंकड़े, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के विवरण और फेड के अधिकारियों के बयानों पर नजर रखेंगे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर जानकारों का इस मामले में क्या कहना है?

बनी रहेगी अस्थिरता

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के (ईबीजी, कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च) के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा कि सोने और चांदी की कीमतों में और अधिक मजबूती देखने को मिल सकती है, लेकिन जीडीपी पर आने वाले अमेरिकी आंकड़े और व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) महंगाई नंबर और फेडरल रिजर्व के अधिकारी की टिप्पणी पर ध्यान केंद्रित होने से अस्थिरता बनी रहेगी. घरेलू बाजार में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी का वायदा भाव पिछले सप्ताह 5,532 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत गिर गया, जबकि सोने का भाव 444 रुपये यानी 0.3 प्रतिशत बढ़ा.

क्यों सस्ता हुआ सोना और चांदी?

एंजेल वन के उपाध्यक्ष (अनुसंधान, गैर-कृषि जिंस और मुद्राएं) प्रथमेश माल्या ने कहा कि फरवरी 2026 में सोने की कीमतों में गिरावट आई है, 13 फरवरी को कीमतें 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर से घटकर लगभग 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई हैं.’ उन्होंने कहा कि उम्मीद से अधिक मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने निकट अवधि में दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जिससे पिछले सप्ताह सोने की कीमतों पर असर पड़ा है. माल्या ने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और चंद्र नव वर्ष से पहले मजबूत खरीदारी के चलते सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में इसकी अपील बरकरार है. इस सप्ताह मंदी और तेजी के बीच खींचतान जारी है और आने वाले सप्ताह में भी अस्थिरता बनी रहेगी.

इंटरनेशनल मार्केट में सोना और चांदी

अगर बात इंटरनेशनल मार्केट की करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स में 84 अमेरिकी डॉलर या 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि चांदी में मामूली बढ़त दर्ज करते हुए यह 77.27 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई. ट्रेडिंग सेशन के अधिकांश समय में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन विदेशी बाजार में यह 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से ऊपर सकारात्मक स्तर पर बंद हुई. प्रणव मेर ने कहा कि व्यापारियों के बीच स्पष्टता की कमी के बीच बुलियन कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है क्योंकि वे प्राइस की दिशा को लेकर विभाजित हैं और नए मौलिक कारकों की तलाश कर रहे हैं.

भारत और चीन से फिजिकल डिमांड में उतार-चढ़ाव

विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, वैश्विक बाजारों में तकनीकी और एआई शेयरों में आई भारी बिकवाली के बीच सुरक्षित निवेश की ओर रुझान और डॉलर इंडेक्स में नरमी ने सोने की कीमतों को सहारा दिया. हालांकि, भारत और चीन से फिजिकल डिमांड में उतार-चढ़ाव, ईटीएफ निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अमेरिका के मजबूत मैक्रो आंकड़ों ने तेजी को सीमित कर दिया. प्रणव मेर ने बताया कि चांदी की कीमतों में भी पूरे सप्ताह अस्थिरता देखी गई, जिसमें दोतरफा उतार-चढ़ाव और उच्च स्तर पर समय-समय पर मुनाफावसूली हुई.

उन्होंने आगे कहा कि औद्योगिक धातुओं में आई गिरावट और प्रमुख टेक्नीकल रसिस्टेंस को तोड़ने में विफल रहने के बाद मुनाफावसूली के कारण सफेद धातु पर दबाव पड़ा. इस पर तकनीकी शेयरों के नेतृत्व वाली ग्लोबल इक्विटी बिकवाली का भी दबाव था, जिसने सभी असेट क्लास में जोखिम लेने की प्रवृत्ति को कम कर दिया. विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी दोनों के सीमित दायरे में रहने की संभावना है क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण और व्यापक वैश्विक आर्थिक दिशा पर अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

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