”नियुक्ति दो या मृत्यु दो”, रायपुर में सीएएफ वेटिंग अभ्यर्थियों का गृहमंत्री विजय शर्मा के घर के बाहर धरना

रायपुर: CAF (छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल) वेटिंग अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर मंगलवार को फूट पड़ा. नाराज अभ्यर्थी अपने परिवार वालों के साथ धरने पर बैठ गए. अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ नाराज अभ्यर्थियों ने गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया, नारेबाजी की. नाराज अभ्यर्थी पिछले कई घंटों से नियुक्ति पत्र दिए जाने की मांग को लेकर बंगले के बाहर डटे हुए हैं.
गृहमंत्री विजय शर्मा के घर के बाहर धरना
CAF (छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल) वेटिंग अभ्यर्थियों का कहना है, ”या तो नौकरी दी जाए या मृत्यु दी जाए. इसके साथ ही हमें लिखित में आश्वासन मिलेगा तभी हम इस जगह से हटेंगे, नहीं तो डटे रहेंगे”. CAF वेटिंग वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी आज भी इसी उम्मीद में हैं कि उन्हें पुलिस की वर्दी मिलेगी. नाराज अभ्यर्थियों का कहना है कि उनको पिछले 7 सालों से सिर्फ आश्वासन मिला है. 3 जनवरी को पीड़ित अभ्यर्थी और उनके परिजनों ने प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात की थी. उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही समस्या का समाधान निकाला जाएगा. इसके बाद पीड़ित अभ्यर्थी नया रायपुर के तूता धरना स्थल लौट गए थे.
क्या कहते हैं पीड़ित अभ्यर्थी
पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि हमें आश्वासन लिखित में चाहिए, तभी हम यहां से हटेंगे. छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन काल में साल 2018 में CAF के लिए 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी. लेकिन उस दौरान प्रदेश के 417 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया. आज भी नौकरी की उम्मीद और आस लगाए CAF की भर्ती प्रक्रिया के वेटिंग के अभ्यर्थी संबंधित अधिकारी, विधायक और मंत्रियों से मिलकर मदद की गुहार लगा रहे है, खुद को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. पीड़ित अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि ”या तो हम मृत्यु लेकर जाएंगे या तो हम नियुक्ति पत्र लेकर जाएंगे.”
बावजूद इसके इन अभ्यर्थियों की समस्याओं पर कोई ठोस पहल नहीं की की जा रही है. जिसके कारण प्रदेश भर के अभ्यर्थी अपने परिवार सहित नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर 22 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं. इन अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक हमें लिखित में आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक हम लोग अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे.
भाजपा शासन के जो भी मंत्री और विधायक हैं, मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि उन्होंने स्लोगन बनाया है, जिसमें लिखा है हमने बनाया है, हम ही सवारेंगे. तो इसे कैसे संवारा जाएगा. उनके शासनकाल में भर्ती निकलती है अब उन्हीं के शासनकाल में हमें धरना देना पड़ रहा है. लेकिन संवारने का काम नहीं कर रहे हैं. आज हमें मजबूरन सड़क पर उतरकर धरना देना पड़ रहा है: वेद व्यास, बिलाईगढ़ सारंगढ़ जिले के पीड़ित अभ्यर्थी
“डबल इंजन की सरकार से हम बस न्याय मांग रहे“
बालोद जिले की अभ्यर्थी चांदनी ने बताया कि “हम लोग वेटिंग के अभ्यर्थी हैं और पिछले 7 सालों से दर-दर भटक रहे हैं. शासन प्रशासन की तरफ से भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही. वेटिंग की प्रक्रिया पिछले 7 सालों से अटकी है, अब आठवां साल भी शुरू होने वाला है. हम वर्दी के भूखे हैं. सिर्फ और सिर्फ हमें वर्दी चाहिए. हमें यह भी पता चला है कि गृहमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हम वेटिंग वालों को वैलिड बताया है. मां-बाप की इकलौती बेटी हूं और हमें कई तरह की पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सरकार का नारा है, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके उलट हो रहा है. छत्तीसगढ़ की बेटियों को सड़क पर उतरने को मजबूर किया जा रहा है.”





