February 18, 2026 4:30 am
ब्रेकिंग
India's Fastest Metro: भारत की सबसे तेज मेट्रो की रफ्तार ने चौंकाया, अब घंटों का सफर मात्र 30 मिनट म... India AI Impact Summit 2026: बिहार में तकनीक का नया दौर, राज्य सरकार ने ₹468 करोड़ के MoU पर किए हस्... Mamata Banerjee vs EC: "चुनाव आयोग की हिम्मत कैसे हुई?" सुप्रीम कोर्ट के नियमों के उल्लंघन पर भड़कीं... Delhi Kidnapping: पहले विश्वास जीता, फिर दूध पिलाने के बहाने बच्चा लेकर फरार! दिल्ली के अंबेडकर हॉस्... Rape Case Verdict: दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को 7 साल की कड़ी सजा और ... Bhupinder Hooda on Crime: "हरियाणा में वही सुरक्षित है जिसे कोई मारना नहीं चाहता"—बढ़ते अपराध पर हुड... Haryanvi Singer Harsh Gupta Arrested: हरियाणवी सिंगर हर्ष गुप्ता गिरफ्तार, पुलिस ने इस गंभीर मामले म... High-Tech Fraud: पेमेंट का फर्जी मैसेज दिखाकर लाखों के गहने ले उड़ा ठग, शातिर की तलाश में जुटी पुलिस Rohtak Gangwar: रोहतक में सरेआम गैंगवार, गोगा की 20 से अधिक गोलियां मारकर हत्या, CCTV में कैद हुई खौ... Haryana Vivah Shagun Yojana: हरियाणा में बेटी की शादी के लिए मिलेंगे 71,000 रुपये, जानें क्या है पात...
विदेश

Putin’s Hybrid War: अमेरिका से यूरोप तक पुतिन के ‘प्रॉक्सी संगठनों’ का जाल, दुनिया में मंडराया हाइब्रिड वॉरफेयर का खतरा

यूरोप के कई देशों में हाल के महीनों में आगजनी, तोड़फोड़ और संदिग्ध साजिशों की घटनाओं में तेजी आई है. सुरक्षा एजेंसियां इन मामलों की कड़ियां रूस से जुड़े नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं. पश्चिमी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये एक संगठित और बदले हुए ढांचे की रणनीति का हिस्सा हैं. जांच में सामने आ रहा है कि कभी खुले युद्ध में सक्रिय रहा रूस का कुख्यात प्रॉक्सी संगठन वागनर ग्रुप नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है और उसकी गतिविधियां नाटो देशों के भीतर तक फैल चुकी हैं.

दरअसल, अगस्त 2023 में जब वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की विमान हादसे में मौत हुई थी, तब दुनिया को लगा था कि इस संगठन का अध्याय बंद हो गया. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ बगावत के दो महीने बाद ही उनकी विमान हादसे में मौत हो गई थी. लेकिन ताजा संकेत बताते हैं कि संगठन खत्म नहीं हुआ, बल्कि उसने अपना रूप बदल लिया है. अब यह खुली जंग लड़ने वाली निजी सेना नहीं, बल्कि डिजिटल संपर्क, स्थानीय भर्तियों जरिए रूस के हितों को आगे बढ़ा रहा है.

निजी सेना से शैडो नेटवर्क तक

प्रिगोझिन के दौर में वैगनर एक ऐसा औजार था, जिससे मॉस्को बिना आधिकारिक जिम्मेदारी लिए अपना काम निकाल लेता था. यूक्रेन के मोर्चे से लेकर अफ्रीका के खनन इलाकों तक, वैगनर ने रूस के रणनीतिक हित साधे. सरकारें बदलीं, सुरक्षा दी गई, और बदले में संसाधनों तक पहुंच मिली. जून 2023 की बगावत के बाद समीकरण बदल गए. प्रिगोझिन की मौत के बाद रूस ने वैगनर की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली. लड़ाकों को रक्षा मंत्रालय के अधीन आने का विकल्प दिया गया. अफ्रीका में ऑपरेशंस को नए ढांचे अफ्रीका कॉर्प्स के जरिए जारी रखा गया. नाम बदला, लेकिन लोग और तरीके वही रहे.

यूरोप में नई चाल: डिजिटल भर्ती और छोटे हमले

अब खेल बदल चुका है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, वैगनर से जुड़े नेटवर्क यूरोप के भीतर नई रणनीति पर काम कर रहे हैं. पहले जहां जंग के मैदान में गोलियां चलती थीं, अब एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स पर बातचीत होती है. आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क किया जाता है. आसान पैसों का लालच देकर उन्हें छोटी लेकिन असरदार तोड़फोड़ के लिए उकसाया जाता है. यूक्रेन समर्थक ठिकानों पर आगजनी जैसे मामलों में इस डिजिटल मॉडल की झलक मिली है.

रिपोर्टों के मुताबिक, 2022 के बाद से यूरोप में रूस या उसके प्रॉक्सी से जुड़ी दर्जनों संदिग्ध घटनाएं दर्ज हुई हैं. 2024 में आगजनी और विस्फोट से जुड़े मामलों में तेज उछाल देखा गया. ये बड़े हमले नहीं होते, लेकिन इनका मकसद डर और अविश्वास का माहौल बनाना है.

नाटो के लिए क्यों बढ़ी टेंशन?

यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने सैकड़ों रूसी राजनयिकों और संदिग्ध एजेंटों को बाहर किया. पारंपरिक जासूसी नेटवर्क कमजोर पड़े. ऐसे में मॉस्को ने एक नया रास्ता चुना ढीले, बिखरे और नकारे जा सकने वाले नेटवर्क. इस मॉडल की खासियत है कि हमलावर सीधे रूसी एजेंसियों से जुड़े नजर नहीं आते. जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है. यही इसकी ताकत है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति पश्चिमी एकता की परीक्षा लेने का तरीका है. वैगनर अब पहले जैसा अर्ध-स्वतंत्र सैन्य बल नहीं रहा, लेकिन उसका शैडो मॉडल जिंदा है.

Related Articles

Back to top button