शारदीय नवरात्रि 2025: अश्विन माह की अमावस्या को किया जाता है मां महामाया के सिर का निर्माण

सरगुजा: नवरात्रि शक्ति की भक्ति का पर्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त दिव्य धार्मिक स्थलों पर जाते हैं और देवी की आराधना कर उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं. सरगुजा में भी एक प्रसिद्ध देवी धाम है. अंबिकापुर के नवागढ़ में मां महामाया का मंदिर स्थित है. मंदिर की मान्यता इतनी ज्यादा है कि देश भर से लोग यहां मां का आशीर्वाद पाने आते हैं. ऐसे भी कुछ लोग है जो विदेश से भारत दौरे पर आते हैं तो वो भी यहां दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं.
हर साल मां महामाया का बनाया जाता है मस्तिष्क: मंदिर के पुजारी पंडित धर्म दत्त अपने पूर्वजों से सुनी बातें बताते हैं. उनका कहना है “पुराने लोग बताते हैं कि मां का सिर तोड़कर रतनपुर तक ले जा सके. उससे आगे नहीं जा सके. मां के सिर का स्थापना महाराजा रतनसिंह ने रतनपुर में की. लेकिन यहां मां बिना मस्तिष्क के हो गई. मां का स्वरूप होना चाहिए. इसलिए मां के चेहरे का जैसा स्वरूप था वो हर साल अश्विन अमावस्या की रात को बनाया जाता है. राज परिवार के कुम्हार मां के मस्तिष्क को बनाते हैं.”
इतिहासकार गोविंद शर्मा बताते हैं “मां महामाया साल 1910 से पहले एक चबूतरे में विराजी थीं. उस दौरान मराठा राजा मां का सिर अपने साथ ले गए. वे रतनपुर तक गए, लेकिन उसके आगे नहीं बढ़ सके. जिसके बाद उन्होंने मां का मस्तिष्क वहीं पर छोड़ दिया. लेकिन अंबिकापुर में माता का विग्रह छिन्न मस्तिष्क हो गया. इसके बाद अश्विनी माह की अमावस्या को मां का मस्तिष्क अंबिकापुर राज परिवार के कुम्हार ने बनाया. उसी साल मां के मंदिर का निर्माण हुआ. और माता को गर्भगृह के अंदर विराजित किया गया. कहा जाता है कि पहले दो मूर्तियां थी बड़ी समलाया और छोटी समलाया. छोटी समलाया को शहर के नजदीक स्थापित किया गया. बड़ी समलाया को महामाया कहा जाने लगा. जोड़े में रखी मूर्तियां अकेली थी इसलिए मिर्जापुर के विध्यांचल से माँ विंध्यवासिनी की मूर्तियां दोनों मंदिरों में महामाया और समलाया के बगल में स्थापित की गई है.”
मां महामाया के बारे में पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं. इनकी शक्ति अलौकिक और दिव्य है. जिसकी वजह से मां के दर्शन करने दूर दूर से लोग आते हैं. यहां शीश झुका कर आशीर्वाद मांगने से उसकी काफी उन्नति होती है-नंद किशोर ताम्रकार, श्रद्धालु
सरगुजा की कुल देवी है. सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है- विवेक तिवारी, श्रद्धालु
हर मंगलवार को हम मां महामाया के मंदिर आते हैं. मां महामाया के बारे में जितना भी बोला जाए कम है- मनोज गुप्ता, श्रद्धालु
नवरात्रि पर महामाया मंदिर में हजारों ज्योतिकलश: महामाया मंदिर के सदस्य उपेंद्र पांडेय बताते हैं कि हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्रि पर अखंड ज्योत जलाई जाती है. हर साल ज्योतिकलश देने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है. इस साल अब तक 5 हजार लोगों की ज्योतिकलश की पर्ची कट चुकी है. इसकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. स्थानीय लोगों के अलावा पूरे भारत और विदेशों से भी लोग ज्योति कलश देते हैं.





