विधानसभा घेरने निकले डुबान प्रभावित किसान! प्रशासन के फूले हाथ-पांव, बीच रास्ते में रोककर दी समझाइश

धमतरी : पांच वर्ष बाद भी न्याय अधूरा, डूबान की पीड़ा अब विधानसभा के दरवाजे पर इस कथन को लेकर गंगरेल बांध के डूबान प्रभावित परिवारों ने बुधवार को विधानसभा घेरने के लिए सैकड़ो लोग पैदल ही निकल पड़े. उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होने पर डुबान प्रभावित 23 फरवरी से गांधी मैदान में अनिश्चिकालीन धरना में बैठे हैं. सभी प्रभावित बुधवार को विधानसभा घेराव के लिए रायपुर निकले. शहर से होते हुए सिहावा चौक पहुंचे ही थे तभी जिला प्रशासन ने उन्हें रोक लिया गया. 5 लोगों का प्रतिनिधि मंडल तहसीलदार के वाहन में चर्चा के लिए रायपुर रवाना हुआ.
डूबान प्रभावित जनकल्याण समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम ने कहा कि डुबान गंगरेल बांध परियोजना से विस्थापित परिवार वर्षों से पुनर्वास और वैकल्पिक भूमि आबंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इसके साथ ही कुछ मांगें की है.
- मंत्रालय में होने वाली वार्ता में प्रभावित परिवारों की अपेक्षा
- पात्र परिवारों को आरक्षित भूमि से समयबद्ध वैकल्पिक कृषि भूमि
- पुनर्वास नीति के अनुरूप बसाहट एवं मूलभूत सुविधाएं
- संपूर्ण प्रक्रिया पर लिखित और समयसीमा बद्ध आदेश
हाईकोर्ट से पारित आदेश—WPC No. 5575/2008 एवं WPC No. 3055/2016 (आदेश दिनांक 16.12.2020)—में संबंधित कलेक्टरों को प्रभावितों की शिकायतों के निराकरण और विधिसम्मत कार्यवाही हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे. यदि इन आदेशों के बावजूद प्रकरण लंबित हैं, तो यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि न्याय की प्रतीक्षा को लंबा करना है- हरिशंकर मरकाम,अध्यक्ष, डूबान जनकल्याण समिति
विधानसभा घेरने निकले किसानों को प्रशासन ने रोका
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं होता देख 25 फरवरी बुधवार को रायपुर में विधानसभा घेराव के लिए निकले. जिसमें सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जीवराखन लाल मरई का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. सिहावा चौक पहुंचे ही थे कि जिला प्रशासन की ओर तहसीलदार आए और उन्हें रोक दिया गया. वार्ता के बाद 5 लोगों का प्रतिनिधि मंडल सचिव से मुलाकात कराने रवाना हुआ.
शासन से बातचीत के बाद ही होगा फैसला
अब निर्णय शासन के हाथ में है. यदि मंत्रालय स्तर की यह वार्ता ठोस, लिखित और क्रियान्वयन योग्य निर्णय में परिवर्तित होती है, तो यह समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा. वरना गांधी मैदान में चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा, जब तक कि मांगों का ठोस एवं संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता. प्रशासन की ओर से पहुंचे तहसीलदार कुसुम प्रधान ने कहा कि पांच लोगों को मंत्रालय मुलाकात के लिए ले जाया जा रहा है.इसके बाद ही आगे किसी बात पर निर्णय हो सकता है.
डूबान प्रभावित क्षेत्र के लोग भूमि की मांग कर रहे हैं.हमने उनकी मांगों को सुना है.इनकी मांगों को शासन को अवगत कराया गया है- कुसुम प्रधान, तहसीलदार
मांगें पूरी नहीं होने पर धरना जारी रखने की बात
डुबान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम के नेतृत्व में डुबान प्रभावित धरने में बैठे हैं. डुबान प्रभावितों का कहना है कि यदि वहां भी बात नहीं बनती है या ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो धरना जारी रहेगा. इस बार निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी.





