February 28, 2026 8:45 pm
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दिल्ली/NCR

दिल्ली दंगा मामला: जमानत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उमर खालिद, हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा के साथ अब उमर खालिद ने भी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. खालिद ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें और आठ अन्य लोगों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.

उमर खालिद ने आज (बुधवार 10 सितंबर) वकील एन साई विनोद के जरिए जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. खालिद ने याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनके साथ ही शरजील इमाम, अतहर खान, खालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.

हाई कोर्ट ने क्या कहा था

हाई कोर्ट ने जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि विरोध के नाम पर हिंसा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर बेंच ने फैसले में कहा ‘नागरिकों द्वारा विरोध या प्रदर्शन की आड़ में किसी भी षड्यंत्रकारी हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती. ऐसी कार्रवाइयों को राज्य मशीनरी द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए, क्योंकि ये अभिव्यक्ति, भाषण और संघ बनाने की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आतीं’.

अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया, पूरी साजिश में इमाम और उमर खालिद की भूमिका गंभीर है, जिन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़े पैमाने पर लामबंद करने के लिए सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण दिए. कोर्ट ने कहा कि मुकदमे को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता है, क्योंकि जल्दबाजी में किया गया मुकदमा अभियुक्त और राज्य दोनों के लिए हानिकारक होगा.

53 लोगों की गई थी जान

ये दंगे फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर हुई झड़पों के बाद हुए थे. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 के दंगों के कथित मास्टरमाइंड होने के आरोप में यूएपीए और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और उन पर आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी सभा के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत कई अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया था. तब से वह जेल में हैं.

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