धराली में क्यों आया था भयंकर जलप्रलय? ISRO की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, गई थी 68 की जान

उतराखंड में उत्तरकाशी के धराली में पिछले साल अगस्त 2025 में जलप्रलय आई थी. इस आपदा में लगभग 68 लोगों की मौत हो गई थी. पूरा धराली कस्बा मलबे में जमीदोंज हो गया था. मंदिर, दुकान, बाजार सब हजारों टन मलबे में दब गए थे. वैज्ञानिकों ने धराली में आए जलप्रलय को लेकर अलग-अलग वजह बताई थी. लेकिन अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) की सैटेलाइट एनलिसिस ने इस आपदा को लेकर बड़ा खुलासा किया है.
ISRO की रिपोर्ट में बताया गया है कि बादल फटने या भारी बारिश की वजह से धराली में जलप्रलय नहीं आई थी. इसके धराली आपदा की वजह बर्फ के विशाल टुकड़े ग्लेशियर के नीचे खिसकने से हुई थी. ISRO की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. रिसर्च में बताया गया है कि ग्लेशियर से 0.25 वर्ग किमी क्षेत्र करीब 75 हजार घन मीटर बर्फ और मलबा 1.7 किलोमीटर नीचे टूटकर गिरा. यानी 69 लाख किलो बर्फ नीचे ढलान की तरफ गिरी और तेज घर्षण के साथ वह पानी में तब्दील होती चली गई.
धराली में पहाड़ से आया था मौत का सैलाब
दरअसल 5 अगस्त 2025 को धराली में पहाड़ से मौत का सैलाब आया था. अब ISRO ने सेटेलाइट तस्वीरों की नई रिसर्च में न सिर्फ इस बात को दोहराया है कि धराली आपदा बर्फ के बड़े टुकड़े के ग्लेशियर से नीचे खिसकने से हुई, बल्कि उसका आकार-प्रकार भी साफ किया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 69 लाख किलो बर्फ नीचे ढलान की तरफ गिरी और तेज घर्षण के साथ वह पानी में तब्दील होती चली गई. रिपोर्ट के मुताबिक ऊपर से नीचे गिरने के कारण स्पीड इतनी थी कि खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में मौजूद भारी मलबा तेजी से धराली की तरफ आया, जिसने भारी तबाही मचाई.
पूरी भागीरथी घाटी में हुई थी तबाही
बताया जाता है कि इस आपदा धराली और आपदा ने न सिर्फ धराली और हर्षिल में भारी तबाही मचाई थी. इतना ही नहीं पूरी भागीरथी घाटी को तबाह कर दिया था. उस समय जो कारण बताए गए, वह ठीक इसके उलट है. उस समय बताया जा रहा था क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटने, भारी बारिश या ग्लेशियर झील का कोई रोल नहीं था बल्कि श्रीकंठ ग्लेशियर का एक बड़ा बर्फ का हिस्सा गिरने से धराली आपदा आई थी. इसके बाद ISRO ने इस घटना की जांच शुरू की थी, जिसकी रिपोर्ट अब सार्वजनिक की गई है.
ISRO के इन वैज्ञानिकों ने की जांच
ISRO के वैज्ञानिक शोधकर्ताओं गिरिबाबू दंडबथुला, ओमकार शशिकांत घटगे, शुभम रॉय, अपूर्व कुमार बेरा और सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपनी नई जांच में निष्कर्ष निकाला है कि यह आपदा न बादल फटने से हुई थी और न ही ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड से. बल्कि धराली के करीब 10 किलोमीटर ऊपर श्रीकंठ ग्लेशियर क्षेत्र में मौजूद एक विशाल आइस-पैच के अचानक ढहने से यह तबाही आई.
विश्लेषण कर घटना की पूरी टाइमलाइन बनाई
रिपोर्ट के मुताबिक ऊपर से नीचे गिरने के कारण स्पीड इतनी थी कि खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में मौजूद भारी मलबा तेजी से धराली की तरफ आया, जिसने भारी तबाही मचाई. इसरो के वैज्ञानिकों ने मल्टी-टेम्पोरल सैटेलाइट इमेजरी, हाई-रेजोल्यूशन डीईएमएस और वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर घटना की पूरी टाइमलाइन बनाई.





