March 9, 2026 6:40 pm
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मध्यप्रदेश

MP के सवा 2 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट! अब देनी होगी अग्निपरीक्षा, फेल हुए तो सीधे होंगे बाहर; जानें सरकार का नया नियम

भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बतौर अतिथि शिक्षक सेवाएं दे रहे शिक्षकों को अपनी पात्रता साबित करने का अंतिम मौका मिलने जा रहा है. राज्य सरकार इसके लिए जल्द ही राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा आयोजित कराने जा रही है. यह परीक्षा जुलाई-अगस्त माह में हो सकती है. इस परीक्षा में सफल न होने वाले अतिथि शिक्षकों को फोर्सफुल रिटायरमेंट दिया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2 लाख 10 हजार प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सभी अतिथि शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है. उधर, अतिथि शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं.

इसलिए देनी पड़ेगी यह परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सितंबर 2025 में दिए गए आदेश से मध्य प्रदेश के सवा दो लाख अतिथि शिक्षक संकट में पड़ गए हैं. यह शिक्षक प्रदेश के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के आधार पर दिया है. इस आदेश के चलते प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा देनी होगी. दरअसल मध्य प्रदेश में 1998 से लेकर 2010 तक अतिथि शिक्षकों की भर्ती हुई, लेकिन इसके पहले पात्रता परीक्षा नहीं कराई गई थी. इसके चलते अब अतिथि शिक्षकों को परीक्षा देनी होगी.

अतिथि शिक्षक परेशान

उधर, इस निर्णय से सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों के सामने संकट खड़ा हो गया है. राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद स्थित प्राथमिक स्कूल में शिक्षक राकेश महाले कहते हैं कि “उन्हें स्कूल में पढ़ाते हुए करीबन 20 साल हो गए हैं. पूरी क्षमता से बच्चों को पढ़ाते आ रहे हैं, आखिर अब पात्रता परीक्षा की जरूरत क्यों है. परीक्षा का नियम नए शिक्षकों के लिए होना चाहिए. 50 साल की उम्र में बाहर हुए तो अब क्या करेंगे. हालांकि, लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता कहती हैं कि “सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा. सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास करनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी

उधर, राज्य शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव के मुताबिक “सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपने स्तर पर सही है, लेकिन इसमें मानवीय दृष्टिकोण भी देखा जाना चाहिए. इसमें बड़ी संख्या में वह शिक्षक हैं, जिन्हें पढ़ाते हुए 20 से 25 साल का समय हो गया है. वह इतने लंबे समय से अपनी दक्षता साबित करते आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर पुनर्विचार याचिका लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए 15 मार्च को बैठक बुलाई गई है, इसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा.”

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