March 13, 2026 6:29 pm
ब्रेकिंग
Balod Water Crisis Alert: भीषण गर्मी को लेकर अलर्ट पर बालोद नगर पालिका, जलापूर्ति के लिए विशेष प्लान... Kawardha Electricity Board Scam: बिजली विभाग के बाबू पर लाखों के गबन का आरोप, पुलिस अब तक क्यों नहीं... Kawardha Collector Inspection: कलेक्टर जन्मेजय महोबे का गांवों में औचक निरीक्षण, सरकारी योजनाओं का ल... Chhattisgarh Assembly: भाटापारा विधायक इंद्र साव का विवादित बयान, सदन में जय श्रीराम के नारों से मचा... सावधान! सरगुजा में 'बारूद' के ढेर पर बैठे लोग? फायर सेफ्टी जांच ठप, प्राइवेट कंपनी बांट रही NOC; गर्... छत्तीसगढ़ के लिए केंद्र का बड़ा फैसला! प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को मिले 15.70 करोड़ रुपए; किसानों ... Chhattisgarh Assembly: अलसी बीज वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप, विधायक उमेश पटेल ने सदन में उठाई जांच ... Chhattisgarh Assembly: अलसी बीज वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप, विधायक उमेश पटेल ने सदन में उठाई जांच ... महुआ बीनने वाले हाथों में अब होगी 'कलम'! सुकमा कलेक्टर की इस जादुई पहल ने बदल दी बस्तर की तस्वीर; नक... गैस माफिया पर महा-एक्शन! भोपाल में कालाबाजारी करते पकड़े गए 24 सिलेंडर; व्यवसायिक ठिकानों पर छापेमार...
देश

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! 12 साल से कोमा में थे हरीश राणा, अब मिलेगी ‘इच्छामृत्यु’; मौत की अर्जी पर अदालत ने लगाई मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को अपने एक फैसले के तहत 31 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो 12 साल से अधिक समय से कोमा में है. इसके लिए कोर्ट ने उसका आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटा दिया. पैसिव यूथेनेशिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी मरीज को जान-बूझकर मरने दिया जाता है, इसके लिए उसे लाइफ सपोर्ट या जिंदा रखने के लिए जरूरी इलाज रोक दिया जाता है या हटा दिया जाता है.

देश की सबसे बड़ी अदालत ने गाजियाबाद के 32 साल के हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है. बेटे की मौत की गुहार लगाते हुए पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच यह फैसला सुनाया.

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है. इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन — To be, or not to be — अर्थात् जीना या न जीना — भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है.”

हरीश राणा पिछले 12 सालों से बैड पर थे और अब उन्हें इच्छामृत्यु के तहत मौत दी जाएगी. इच्छामृत्यु के तहत मौत गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को मान्यता देने वाले 2018 के कॉमन कॉज फैसले का पहला न्यायिक कार्यान्वयन है. सुप्रीम कोर्ट के बेंच के फैसले से पहले कोर्ट की ओर से गठित 2 चिकित्सा बोर्डों ने अपनी रिपोर्ट दी थी कि हरीश के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है.

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश के माता-पिता की ओर से दाखिल याचिका के मुताबिक, वह पिछले 12 साल से ज्यादा समय से बिस्तर पर ही सांसें ले रहा है. इस दौरान हरीश को तरल भोजन दिया जाता है.

Related Articles

Back to top button