March 12, 2026 5:10 pm
ब्रेकिंग
"नेताजी की अस्थियां कहां हैं?"—सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; याचिकाकर्ता से पूछा ऐसा सवाल क... Share Market Crash Today 2026: क्यों गिरा आज शेयर बाजार? जानें वे 5 बड़े कारण जिनसे निवेशकों को लगा ... Rahul Gandhi in Lok Sabha: लोकसभा में गूंजा ईरान संकट, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; पूछा— "अमेरिका ... Iran Conflict Update: ईरान में फंसे 9000 भारतीय, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया वतन वापसी का पूरा प्ल... बड़ी खबर: टेरर फंडिंग केस में शब्बीर शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत! 7 साल बाद जेल से आएंगे बाहर... LPG Crisis in Rural Areas: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव, अब 45 दिन करना... दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट: अभी इतना काम है बाकी, इन वाहनों को नहीं देना होगा 1 रुपया... संसद में गूंजी थाली-चम्मच की आवाज! LPG संकट पर TMC महिला सांसदों का अनोखा विरोध; सदन में भारी हंगामा... थरूर का मणिशंकर अय्यर को करारा जवाब: "विदेश नीति भाषण देने के लिए नहीं, देश के हित के लिए होती है!" ... फारूक अब्दुल्ला पर हमला? पूर्व CM का खौफनाक खुलासा— "मुझे लगा पटाखा फूटा, बाद में पता चला गोली चली!"...
झारखण्ड

Khadi Mahotsav 2026: संथाल परगना में खादी महोत्सव की धूम, रोजगार के लिए शुरू होगा विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम; जानें कैसे उठाएं लाभ

देवघर: शहर के पुराने बस स्टैंड परिसर में इन दिनों खादी ग्रामोद्योग आयोग की ओर से आयोजित खादी महोत्सव लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है. इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य संथाल परगना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को खादी उद्योग से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. मेले में खादी से बने विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ-साथ लोगों को इसके उपयोग और इससे मिलने वाली रोजगार संभावनाओं की जानकारी भी दी जा रही है.

गरीबी-बेरोजगारी से जूझते संथाल परगना में खादी को बढ़ावा

संथाल परगना क्षेत्र में आज भी गरीबी और बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य खादी बोर्ड की ओर से देवघर में इस महोत्सव का आयोजन किया गया है. आयोजकों का कहना है कि खादी उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है. प्रदर्शनी में खादी के कपड़े, हस्तशिल्प उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई से तैयार परिधान और अन्य ग्रामीण उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता

मेले में अपनी दुकान लगाए मनोज शर्मा ने बताया कि खादी आज के दौर में ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन चुकी है. उन्होंने कहा कि देवघर और दुमका सहित संथाल क्षेत्र के कई स्थानों पर ऐसे केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और खादी से जुड़े अन्य कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है. इन केंद्रों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं.

युवाओं की बदलती पसंद, खादी के लिए चुनौती

वर्षों से खादी के कारोबार से जुड़े शत्रुघ्न झा का मानना है कि खादी उद्योग में देश के बड़े हिस्से को रोजगार देने की क्षमता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज के युवा अधिक डिजाइनदार और रंगीन कपड़ों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. खादी के अधिकांश कपड़े साधारण डिजाइन के होते हैं, जिसके कारण युवाओं का झुकाव इसकी ओर कम दिखाई देता है. उनका सुझाव है कि यदि बुनकरों और कारीगरों को आधुनिक डिजाइनिंग की विशेष ट्रेनिंग दी जाए तो खादी उत्पादों की मांग में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.

प्रशासनिक अधिकारियों ने भी की खरीदारी

खादी महोत्सव का आकर्षण केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहा. जिले के कई प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मेले का दौरा किया और खादी उत्पाद खरीदे. इस दौरान एसडीएम रवि कुमार, अपर समाहर्ता हीरा कुमार और एनडीसी शैलेश कुमार सहित कई अधिकारियों ने स्टॉलों का निरीक्षण किया और खादी के महत्व को रेखांकित किया. अधिकारियों ने कहा कि खादी भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान रही है. स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह देशभक्ति और स्वावलंबन का प्रतीक बनी थी. आज एक बार फिर खादी का महत्व बढ़ रहा है, क्योंकि यह न केवल आरामदायक कपड़ा है बल्कि भारतीयता की पहचान भी है.

केंद्र सरकार की योजनाओं से ग्रामीणों को लाभ

राज्य खादी बोर्ड के निदेशक मांगेराम ने बताया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के अवसर पैदा करना है, ताकि लोगों को काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन न करना पड़े. उन्होंने कहा कि संथाल परगना के दुमका, गोड्डा, देवघर, पाकुड़, साहेबगंज और जामताड़ा जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं को खादी उद्योग से जोड़ने के लिए मशीनें और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही धागा निर्माण से लेकर तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया भी बताई जा रही है.

सुदूर गांवों तक पहुंचाने की मांग

झारखंड के संथाल क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि इस तरह के खादी महोत्सव और प्रदर्शनी कार्यक्रम लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेंगे. मेले में पहुंचे कई लोगों का कहना है कि सरकार को केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी जाकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी खादी उद्योग से जुड़कर अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकें.

Related Articles

Back to top button