March 13, 2026 9:27 pm
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दिल्ली/NCR

उमर खालिद पर सुनवाई में दिल्ली पुलिस का चौंकाने वाला दावा! ‘डॉक्टर-इंजीनियर भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल’, कोर्ट में हुआ खुलासा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उमर खालिद, शरजील इमाम सहित अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की. इस दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से ASG एसवी राजू ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया. सुनवाई के दौरान ये भी कहा गया कि आजकल यह चलन बन गया है कि डॉक्टर, इंजीनियर अपने पेशे का काम नहीं कर रहे हैं बल्कि देश विरोधी कामों में शामिल हो रहे हैं.

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को बताया कि सुनवाई में देरी आरोपियों की वजह से हुई है और वे इसका फ़ायदा नहीं उठा सकते. राजू ने नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ इमाम के भड़काऊ भाषण के वीडियो शीर्ष अदालत में दिखाए.

‘ये कोई आम प्रदर्शन नहीं, हिंसक प्रदर्शन’

वीडियो में इमाम को फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों से पहले 2019 और 2020 में चाखंड, जामिया, अलीगढ़ और आसनसोल में भाषण देते हुए देखा गया. अधिवक्ता ने कहा कि इमाम इंजीनियरिंग स्नातक है. उन्होंने कहा, आजकल यह चलन बन गया है कि डॉक्टर, इंजीनियर अपने पेशे का काम नहीं कर रहे हैं बल्कि देश विरोधी कामों में शामिल हो रहे हैं. राजू ने कहा, यह कोई सरल प्रदर्शन नहीं है, ये हिंसक प्रदर्शन हैं. वे बंद की बात कर रहे हैं.

इस मौके पर न्यायमूर्ति कुमार ने पूछा कि क्या भाषण आरोपपत्र का हिस्सा थे, जिसका राजू ने हां में जवाब दिया. खालिद, इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और रहमान पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत 2020 के दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था. दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा घायल हो गए थे.

आरोपी खुद जिम्मेदार

सुनवाई के दौरान ASG ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट में हो रही देरी के लिए खुद आरोपी पक्ष ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने शीर्ष अदालत को उन पहले के आदेशों का हवाला दिया, जिनमें यह दर्ज है कि कई मौकों पर बचाव पक्ष के वकील आरोप तय करने संबंधी दलीलों के दौरान पेश ही नहीं हुए. दिल्ली पुलिस का तर्क है कि ऐसे हालात में जमानत देना उचित नहीं होगा, क्योंकि मुकदमे की प्रक्रिया में देरी का कारण स्वयं आरोपी हैं.

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