March 18, 2026 11:59 pm
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मध्यप्रदेश

ईरान-इजरायल जंग की ‘आंच’ में जला बुंदेलखंड का स्वाद! 100 साल पुराने जायके पर मंडराया संकट; जानें कैसे आपके किचन तक पहुँचा युद्ध का असर

सागर : वैसे तो बुंदेलखंड के खानपान के कई जायके ऐसे हैं कि एक बार खाने वाला ऐसा शौकीन हो जाता है कि बार-बार स्वाद लेना चाहता है. ऐसा ही जायका है चिंरोजी की बर्फी का, जिसके शौकीन सिर्फ सागर ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों में भी हैं. ईरान-इजरायल के बीच युद्ध लंबा खिंचा तो इस स्वाद के दीवानों को झटका लग सकता है.

100 साल पुरानी दुकान पर ताला लगने की नौबत

रसोई गैस की किल्लत के कारण 100 साल पुराने मीठे के जायके पर संकट के बादल छा गए हैं. बर्फी की मांग के अनुसार निर्माता चौधरी मिष्ठान वालों को रोजाना डेढ़ से दो कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत पड़ती है, लेकिन पिछले दिनों सिलेंडर की बिक्री पर लगाई गयी. रोक के बाद चौधरी मिष्ठान वालों ने ऐलान कर दिया कि 15 मार्च से चौधरी मिष्ठान बंद कर दिया जाएगा.

राहत की बात ये है कि कमर्शियल सिलेंडर पर रोक हटा ली गयी है. फिलहाल चौधरी मिष्ठान बंद नहीं हुआ है, लेकिन चिंरोजी बर्फी के निर्माता और स्वाद के शौकीनों को अभी भी चिंता है. क्योंकि घरेलू गैस पर तो रोक लगाई नहीं फिर भी बड़ी मुश्किल से मिल रही है. अगर कमर्शियल सिलेंडर के हाल भी घरेलू सिलेंडर जैसे रहे तो 100 साल पुराने चौधरी मिष्ठान पर ताला लटक सकता है.

चिंरोजी की बर्फी का 100 साल पुराना जायका

सागर शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले तीन बत्ती पर स्थित चौधरी मिष्ठान भंडार 2025 में चौधरी मिष्ठान अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना चुका है. इसे स्थानीय लोग जमना मिठया की दुकान कहते हैं. दुकान संचालक रमेश चौधरी बताते हैं “1925 में हमारे पिताजी जमना प्रसाद चौधरी ने दुकान की शुरूआत की थी. आज भी ये दुकान उनके नाम से ही जानी जाती है. 1978 में उनका निधन हो गया, तब उनके बेटे हेमचंद्र चौधरी ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर दुकान संभाली. करीब 40 साल तक 2018 में निधन के पहले तक वही दुकान का संचालन करते रहे.”

चिंरोजी की बर्फी का स्वाद निराला

चौधरी मिष्ठान पर सिर्फ देशी मिठाइयां बनायी जाती हैं. इनमें चिरोंजी की बर्फी के अलावा गरी की बर्फी, जलेबी, पेड़ा, लड्डू, गुजिया वगैरह है. आजकल जो नए तरीके और नए फ्लेवर की मिठाइयां चली हैं, वे चौधरी मिष्ठान पर नहीं मिलती. चिंरोजी की बर्फी की तो बात ही निराली है. सागर शहर के लोगों की जीभ पर तो इसका स्वाद चढ़ा हुआ है.

बुंदेलखंड और आसपास के शहरों में भी चिरोंजी की बर्फी के स्वाद की चर्चा है. सागर जिले और शहर में तो ये आलम है कि कोई भी पूजा-पाठ, शादी ब्याह या मांगलिक कार्य होता है, उसमें चिरोंजी की बर्फी विशेष तौर पर रखी जाती है. जब भी कोई बाहर अपने रिश्तेदार यहां कहीं पर जाता है तो शगुन के तौर पर बर्फी जरूर ले जाता है.

कोई नहीं कर पाया रैसेपी चोरी

मिष्ठान भंडार के संचालक रमेश चौधरी बताते हैं “हमारी बर्फी की तरह यहां के और बाहर के कई दुकानदारों ने बनाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी चौधरी मिष्ठान भंडार की तरह बर्फी नहीं बना पाया, जबकि यहां पर मिठाई सबके सामने बनती है. इसे दुकान में ही कारीगर बनाते हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ घर का कोई व्यक्ति बनाता है, यहां कई सालों तक काम करने वाले कारीगरों ने दूसरी जगह बनाने की कोशिश की, लेकिन वैसी बर्फी नहीं बना पाए, जैसा स्वाद चौधरी मिष्ठा भंडार का होता है.”

कोयले की भट्ठी से बात नहीं बनी

9 मार्च को कमर्शियलय सिलेंडर पर रोक लगा दी गयी तो आननफानन में चौधरी मिष्ठान भंडार को भट्ठी का इंतजाम करना पड़ा. जब उनका पहले की तरह काम ना हो सका तो उन्होंने दुकान पर पोस्टर लगा दिया कि कमर्शियल गैस की कमी के कारण 14 मार्च से दुकान बंद हो सकती है. अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनी तो दुकान खुली रहेगी.

दुकान संचालक रमेश चौधरी बताते हैं “गैस की कमी के कारण उन्हें दुकान में बैनर लगाना पड़ा. क्योंकि मिठाई बनाने के लिए कमर्शियल गैस मिलना बंद हो गया था. कोयले और डीजल की व्यवस्था भट्ठी चलाने के लिए हो नहीं पा रही थी. इसलिए हमने ग्राहकों की सुविधा के लिए बैनर लगा दिया था.”

कमर्शियल सिलेंडर में छूट के बाद भी चिंता

कमर्शियल गैस में भले ही छूट मिल गयी हो, लेकिन दुकानदारों और उनके ग्राहकों को भरोसा नहीं है कि पहले की तरह कमर्शियल सिलेंडर मिल पाएंगे. स्थानीय नागरिक सिंटू कटारे कहते हैं “अब आप ही देख लें कि पूरे देश में हाहाकार मचा है और नारा देते हैं कि मोदी है तो मुमकिन है. ये 100 साल पुरानी बुंदेलखंड की चौधरी मिष्ठान की दुकान है. पूरे शहर में प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान है. आप देख लो कैसे उनको बैनर लगाना पड़ा. ये तो ठीक है कि चौधरी जी अपनी दुकान चल रहे हैं, दूसरे छोटे दुकानदार दो-तीन हजार देने के लिए तैयार है, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल रहा.”

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