नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम के किसानों के चेहरे शुक्रवार सुबह खिलखिला उठे, जब उन्होंने मूंग की फसल में पानी जाते देखा. किसानों को उम्मीद है कि इस बार उनकी मूंग की फसल खूब लहलहाएगी. मूंग की फसल को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार यानि 27 मार्च की सुबह 9 बजे तवा डैम से नहरों में ... Read more
नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम के किसानों के चेहरे शुक्रवार सुबह खिलखिला उठे, जब उन्होंने मूंग की फसल में पानी जाते देखा. किसानों को उम्मीद है कि इस बार उनकी मूंग की फसल खूब लहलहाएगी. मूंग की फसल को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार यानि 27 मार्च की सुबह 9 बजे तवा डैम से नहरों में पानी छोड़ा गया. जल प्रवाह शुरू करने से पहले विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और समय पर पानी मिलने पर खुशी जताई.
तवा डैम के एसडीओ एनके सूर्यवंशी ने बताया कि “हरदा जिले के लिए बायीं तट मुख्य नहर से जल आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई है. उन्होंने बताया कि किसानों की मांग और मूंग फसल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चरणबद्ध तरीके से विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाएगा.” पानी छोड़ने से पहले पूजा-अर्चना एसडीओ एनके सूर्यवंशी द्वारा संपन्न कराई गई. इस अवसर पर मौजूद किसानों ने उम्मीद जताई कि समय पर सिंचाई पानी मिलने से मूंग की फसल को अच्छा लाभ मिलेगा और उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी.
348.38 मीटर तवा डैम का जलस्तर
एसडीओ सूर्यवंशी ने कहा कि आज सुबह तवा जलाशय का जलस्तर 348.38 मीटर (1143.00 फीट) दर्ज किया गया है. जलाशय की लाइव क्षमता 862 एमसीयूएम है और वर्तमान में जलभराव 44 प्रतिशत है. बायीं तट मुख्य नहर से 766 क्यूसिक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिसे आवश्यकता अनुसार बढ़ाया भी जाएगा.
तवा परियोजना के अनुसार 1 अप्रैल से सिवनी-मालवा क्षेत्र की रायगढ़, मकड़ई, भिलाड़िया और मिसरोद उपनहरों में पानी पहुंचेगा. इसके बाद 5 अप्रैल से इटारसी और नर्मदापुरम क्षेत्र की सुपरली, इटारसी और होशंगाबाद उपनहरों में जल आपूर्ति शुरू की जाएगी. इसके अलावा पिपरिया शाखा नहर (सोहागपुर) के लिए दायीं तट मुख्य नहर से 8 अप्रैल से किसानों की मांग के अनुसार पानी छोड़ा जाएगा.” तय कार्यक्रम के अनुसार सभी क्षेत्रों में पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा.
समय पर पानी मिलने से किसानों को मूंग की फसल की सिंचाई में राहत मिलेगी और उत्पादन बढ़ने की संभावना है. किसान भी लंबे समय से नहरों में पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे थे, जिसे अब पूरा कर दिया गया है.