March 29, 2026 5:04 pm
ब्रेकिंग
Jharkhand Ramnavami Celebration: हजारीबाग की सड़कों पर उमड़ा भक्तों का जनसैलाब, रामनवमी जुलूस की धूम Courier Drug Trafficking: पोस्ट ऑफिस के जरिए हो रही नशीले पदार्थों की सप्लाई, पुलिस ने शुरू किया विश... खौफनाक साजिश! प्रेमिका ने ही प्रेमी से कहा- 'मेरे होने वाले ससुर को उड़ा दो', फायरिंग के बाद दोनों ग... Bageshwar Dham Sarkar News: छत्तीसगढ़ के छुरी पहुंचे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, शादी को लेकर कही यह बा... Jail Guard Suspended: कैदी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप में दो जेल प्रहरी सस्पेंड, जांच के आदेश बंदूकों से ज्यादा घातक साबित हो रहे जमीन में दबे IED! 25 साल में 1,277 धमाके, जानें क्यों थमी नहीं ह... Sukma Encounter: सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, माओवादियों का सेक्शन कमांडर ढेर छत्तीसगढ़ में माता कर्मा जयंती की भव्य तैयारियां! मुख्य अतिथि होंगे CM विष्णुदेव साय, जानें कार्यक्र... छत्तीसगढ़ की निकिता ने वेटलिफ्टिंग में सोना जीतकर रचा इतिहास! खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की कुश्... Khelo India Tribal Games 2026: तैराकी में ओडिशा का दबदबा, खिलाड़ियों ने जीते 3 गोल्ड मेडल
टेक्नोलॉजी

Epstein Victim Sues Google: एप्स्टीन पीड़िता ने गूगल पर किया मुकदमा, निजी डेटा लीक और सुरक्षा में चूक का लगाया गंभीर आरोप

जेफरी एपस्टीन से जुड़े मामले ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है. एक पीड़िता ने गूगल और अमेरिकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है. पीड़िता का दावा है कि केस से जुड़े दस्तावेज जारी करते समय उसकी और अन्य पीड़ितों की निजी जानकारी सुरक्षित नहीं रखी गई. इतना ही नहीं, यह संवेदनशील डेटा आज भी इंटरनेट और सर्च के जरिए आसानी से देखा जा सकता है. यह मामला अब डेटा प्राइवेसी और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

क्या हैं Google और अमेरिकी सरकार पर आरोप?

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस पर आरोप लगाया है कि उसने कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया. दावा है कि दस्तावेज जारी करते समय व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी हटाई नहीं गई. इन दस्तावेजों में नाम, ईमेल, फोन नंबर, पेशा और तस्वीर जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल थी. वकीलों का कहना है कि यह पीड़ितों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही है. मुकदमे में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों ने पारदर्शिता के नाम पर जल्दबाजी में डेटा जारी किया और पीड़ितों की पहचान को सुरक्षित रखने को प्राथमिकता नहीं दी.

इंटरनेट और AI सर्च से कैसे फैल रहा डेटा

मामले में यह भी आरोप है कि गूगल ने इन दस्तावेजों को इंडेक्स और कैश करके डेटा के फैलाव में अहम भूमिका निभाई. पीड़िता का दावा है कि सर्च करने पर यह जानकारी अब भी सामने आ जाती है. खास चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्च फीचर्स को लेकर जताई गई है. आरोप है कि AI टूल्स अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जोड़कर किसी व्यक्ति की पूरी प्रोफाइल तक दिखा सकते हैं. इससे पीड़ितों की लोकेशन, पहचान और संपर्क जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा आसानी से एक्सेस किया जा सकता है, जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

डेटा हटाने की मांग, लेकिन विवाद जारी

पीड़िता के वकीलों ने बताया कि गूगल से कई बार अनुरोध किया गया कि इस डेटा को सर्च रिजल्ट से हटाया जाए. हालांकि, आरोप है कि कंपनी ने अब तक पूरी तरह से इसे डी-इंडेक्स नहीं किया. सरकार ने बाद में कुछ डेटा हटाने की बात स्वीकार की, लेकिन मुकदमे में कहा गया है कि अनएडिटेड दस्तावेज अब भी इंटरनेट पर घूम रहे हैं.

Related Articles

Back to top button