MP Wildlife News: खिवनी में बाघिन ‘मीरा’ और शावकों का दिखा अद्भुत नजारा, पर्यटकों के सामने आया ‘युवराज’

देवास: खिवनी अभ्यारण्य में बढ़ती गर्मी के साथ बाघ दिखने लगे हैं और इन्हें देखने देश के कोने-कोने से पर्यटकों का जमावड़ा खिवनी में लगने लगा है. खिवनी अभ्यारण्य में लगभग 10 से बाघों की मौजूदगी है, जिनमें वर्तमान में जन्मे बाघ युवराज और मीरा के तीन शावक भी हैं. खिवनी घूमने आए पर्यटकों के कैमरों में युवराज और मीरा के तीन शावक जंगल में मस्ती करते नजर आए. वीडियो में साफ दिख रहा है कि अपनी मां मीरा के साथ तीनों शावक अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं और बाघ युवराज आगे-आगे चल रहा है.
जिप्सी के आगे आ गया बाघ, थमी सांसें
शनिवार को जंगल सफारी के दौरान बाघ युवराज को अपनी गाड़ी के आगे कच्चे रास्ते पर चलते देख पहले तो पर्यटकों की सांसे रुक गई. फिर थोड़ी ही देर में शान से चल रहे बाघ को पर्यटकों ने अपने कैमरो में कैद कर लिया. वन विभाग के अधिकारी भीम सिंह ने मीडिया को बताया कि, ”प्रदेश के देवास जिले का खिवनी अभ्यारण्य देवास और सीहोर जिले की सीमा में लगभग 134 वर्ग किलोमीटर में फैला है. अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ते, लकड़बग्घा, विभिन्न प्रजातियों के हिरण, कई प्रजातियों के सांप सहित 100 से अधिक प्रजातियों के पक्षी रहते हैं.”
वर्तमान में प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से बाघ सहित विभिन्न वन्य प्राणियों को देखने खिवनी में पर्यटकों का जमावड़ा नजर आ रहा है. खिवनी में सबसे ज्यादा पर्यटक बाघों को देखने आ रहे हैं. पर्यटक रोमांचित होते हुए कैमरों में भी उनकी वीडियो और तस्वीरें कैद करते नजर आ रहे हैं. अब खिवनी में वन्य प्राणियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. वन विभाग द्वारा खिवनी में मौजूद विलुप्त वन्य प्राणियों के स्वास्थ्य ध्यान रखा जा रहा है और सुरक्षा का पूरा जिम्मा भी उठाया जा रहा है.
देवास और सीहोर जिले में फैला है खिवनी अभ्यारण
खिवनी अभ्यारण लगभग 134 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें देवास जिले में लगभग 89.9 वर्ग किमी का क्षेत्र आता है तथा सीहोर जिले का 44.8 वर्ग किमी का क्षेत्र आता है. खिवनी अभ्यारण्य आज मध्य प्रदेश के उन चुनिंदा प्राकृतिक स्थलों में शामिल हो रहा है, जहां वन्य जीवन संरक्षण और पर्यटन के बीच अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है. पर्यटकों का आगवानी और मेजबानी करने के लिए प्रकृति तैयार खड़ी है. इस अभ्यारण में एक ओर जहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ वन्यजीव और आमजन को अपनी और आकर्षित कर रहे हैं, वहीं अभ्यारण में अनेक प्रकार की औषधीय पौधें भी हैं.





