April 3, 2026 7:02 pm
ब्रेकिंग
लातेहार में बवाल! 18 लोगों पर FIR के विरोध में बाजार बंद; सड़कों पर उतरा समाज, दी बड़े आंदोलन की चेत... LPG संकट ने याद दिलाए 'मिट्टी के चूल्हे'! रांची के बाजारों में मिट्टी और लकड़ी के चूल्हों की भारी मा... Ranchi LPG Crisis: राजधानी में रसोई गैस के लिए हाहाकार! एजेंसी के बाहर प्रदर्शन और सड़क जाम; प्रशासन... झारखंड में जनगणना पर 'महाभारत'! पहले ही चरण में केंद्र और राज्य में ठनी; वादाखिलाफी का बड़ा आरोप रांची पुलिस का 'क्विक रिस्पॉन्स' अवतार! हाई-टेक मॉनिटरिंग से अपराध पर लगाम; अब बच नहीं पाएंगे अपराधी Dhanbad Jail Inspection: जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने किया धनबाद जेल का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था का लि... मच्छरदानी और गैस सिलेंडर! खूंटी में रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर; रातभर पहरे के बाद भी नहीं मिली ... Palamu Encounter: बस स्टैंड हत्याकांड के आरोपी और पुलिस के बीच भिड़ंत, जवाबी फायरिंग में अपराधी घायल तेजस्वी यादव का 'मिशन झारखंड'! कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार रांची दौरा; 5 अप्रैल को फूकेंग... झारखंड का महुआ अब बनेगा 'इंटरनेशनल ब्रांड'! फूड ग्रेन उत्पादन शुरू, दुनिया भर के बाजारों में मचेगी ध...
धार्मिक

श्राद्ध में कौवे ने नहीं लगाया भोग तो क्या करें? जानें पंचबलि भोग का महत्व और सही तरीका

 हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को अर्पित करना चाहिए, क्योंकि कौवा पितरों का दूत माना गया है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि श्राद्ध वाले दिन घर के आंगन या छत पर कौवे दिखाई नहीं देते. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कौवा न मिलें, या कौवे भोजन ग्रहण नहीं करें तो पितरों का भोजन किसे अर्पित किया जाए?

कौवा भोग न लगाएं तो क्या करें?

अगर श्राद्ध के दिन आप कौवे को भोजन ग्रहण न करा पाएं तो आप कौवे के हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते या चींटी को खिला सकते हैं. गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है और कुत्ते को यम का प्रतीक माना गया है. इसलिए गाय या कुत्ते को भोजन कराने से पितरों तक आपका भोग पहुंच जाता है. इसके अलावा, आप कौवे के हिस्से का भोजन किसी जलकुंड, नदी, या तालाब में मछलियों को भी डाल सकते हैं.

पंचबलि का महत्व और सही तरीका

श्राद्ध में पंचबलि भोग का बहुत बड़ा महत्व है. क्योंकि पितरों का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और देवताओं को खिलाया जाता है, इसे पंचबलि भोग कहते हैं. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है. ऐसी मान्यता है कि इन पांचों को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है और वे तृप्त होते हैं. लेकिन इन सभी में कौवे का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

पंचबलि भोग निकालते समय इन बातों का ध्यान रखें?

पंचबलि के लिए भोजन: पंचबलि के लिए सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखें. यह भोजन वही होना चाहिए जो आपने श्राद्ध के लिए बनाया है.

सही क्रम: पंचबलि हमेशा एक विशेष क्रम में निकाली जाती है.

गौ बलि: सबसे पहले एक पत्ते पर भोजन रखकर गाय को खिलाएं.

श्वान बलि: इसके बाद दूसरे पत्ते पर भोजन रखकर कुत्ते को खिलाएं.

काक बलि: तीसरे पत्ते पर भोजन रखकर कौवे के er67 निकालें.

अगर कौवा न मिले तो उसके हिस्से का भोजन गाय या कुत्ते को खिलाएं.

देव बलि: चौथे पत्ते पर भोजन देवताओं के लिए रखें. इसे जल में प्रवाहित किया जाता है.

पिपीलिका बलि: आखिरी में, पांचवें पत्ते पर भोजन चींटियों के लिए जमीन पर रखें.

इन पांचों जीवों को भोजन कराने से न केवल पितरों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि आपके द्वारा किए गए तर्पण और श्राद्ध को भी पूर्णता मिलती है. यह माना जाता है कि इन जीवों के माध्यम से ही पितरों तक हमारा भोग और श्रद्धा पहुंचती है.

Related Articles

Back to top button