Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Latehar News: लातेहार में सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, ग्रामीणों ने कहा- 'हाथ लगाते ही रेत क... Giridih News: गिरिडीह में जमीन विवाद को लेकर दो गुटों में जमकर पथराव, मौके पर पहुंची पुलिस ने संभाला... प्रज्ञा केंद्र संचालक गोलीकांड: पुलिस का बड़ा एक्शन, दो अपराधियों के खिलाफ FIR दर्ज और संदिग्ध हिरासत... Raipur News: रायपुर की बड़ी गैस एजेंसी निलंबित, 12 हजार उपभोक्ता दूसरी एजेंसियों में मर्ज; जानें अब ... Census 2027: जनगणना में अब छत-दीवार की सामग्री और पेयजल स्रोत की भी देनी होगी जानकारी, गृह मंत्रालय ... क्या है 'सियान गुड़ी' योजना? बुजुर्गों को एक ही छत के नीचे कैसे मिल रही सुरक्षा और खुशियां; जानें इस... खाद और लोन के नाम पर किसानों से धोखाधड़ी: सरकारी फाइलों में हुआ आहरण, शिकायत के बाद भी प्रशासन मौन; ... Agriculture & Veterinary Admission 2026: कृषि और पशु चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश शुरू, यहाँ देखे... West Bengal: सड़क-बिजली नहीं, भारतीय पहचान साबित करने का है ये चुनाव; 6 परिवारों की रूह कंपा देने वा... मंडप में सेहरा बांधकर पहुंचे दो दूल्हे, दुल्हन हो गई कन्फ्यूज कि किससे करे शादी? फिर जो हुआ वो कर दे...

Nari Shakti Vandan: 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र, OBC आरक्षण की मांग ने बढ़ाई सियासी तपिश; आर-पार के मूड में विपक्ष

नारी शक्ति वंदन कानून लेकर पहले ही विपक्ष सीटें बढ़ाने के मामले में दक्षिण भारत को उत्तर भारत के मामले में नुकसान का मुद्दा उठाकर नाराजगी जाहिर कर चुका है. अब आरक्षण में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा उठाकर वो सरकार के लिए नया सिरदर्द पैदा करता दिख रहा है. दरअसल, इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के कई दल राहुल गांधी पर दबाव बना रहे हैं कि वे सिर्फ ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के मुद्दे को उठाने तक सीमित न रहें, बल्कि ओबीसी आरक्षण की मांग को भी उतनी ही मजबूती से संसद और जनता के सामने रखें. उनका मानना है कि सामाजिक न्याय की राजनीति को और स्पष्ट तथा प्रभावी बनाने की जरूरत है.

खुद कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने भी यही मांग की है. ऐसे में राहुल गांधी के सामने एक राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. यदि वे इस मांग का समर्थन करते हैं, तो उन्हें इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना होगा. वहीं, अगर वे इससे दूरी बनाते हैं, तो गठबंधन के भीतर असहमति बढ़ सकती है, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर असर पड़ सकता है. वैसे खुद भी राहुल गांधी ओबीसी के मुद्दे को हाल में लगातार मजबूती से उठाते आए हैं.

सरकार को दो तिहाई समर्थन चाहिए

वहीं, राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो 2023 में लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल था, जिससे वह अपने कई विधेयकों को आसानी से पारित करा सकी. लेकिन अब परिस्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है. अब इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को दो तिहाई यानी 364 सांसदों का समर्थन चाहिए, जो बिना विपक्ष के सहयोग के जुटाना मुश्किल दिखाई दे रहा है.

विशेष सत्र में हंगामे के आसार

सरकार को जहां विपक्ष का भरोसा जीतना होगा, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता और रणनीति को मजबूत करने की कोशिश करेगा. कुल मिलाकर 16 अप्रैल से फिर तीन दिन के लिए शुरू होने वाले विशेष सत्र में यह एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है. इस पर हंगामे के आसार हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.