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BRICS Foreign Ministers Meeting: जयशंकर का बड़ा बयान- सैन्य शक्ति और प्रतिबंध नहीं, संवाद से निकलेगा समाधान

नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने गुरुवार को साफ संकेत दिया कि दुनिया जिस अस्थिर दौर से गुजर रही है, उसमें सिर्फ सैन्य शक्ति या प्रतिबंध समाधान नहीं हो सकते। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखते हुए एक साथ कई बड़े संदेश दिए। उन्होंने पश्चिम एशिया से लेकर आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर विस्तार से बात की।

🌊 समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा संकट: होर्मुज और रेड सी की स्थिति पर जताई चिंता

जयशंकर के बयान में सबसे अहम फोकस पश्चिम एशिया की स्थिति पर दिखा। उन्होंने सीधे तौर पर Strait of Hormuz और Red Sea का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री रास्तों में बाधा और ऊर्जा ढांचे पर खतरे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे समय में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह बेहद जरूरी है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र में तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

🕊️ गाजा और वैश्विक संघर्ष: मानवीय संकट और सीजफायर पर भारत का स्टैंड

भारत ने बैठक में गाजा का मुद्दा भी उठाया और साफ कहा कि मानवीय संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत ने सीजफायर, मानवीय पहुंच और ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का समर्थन दोहराया। इसके साथ ही लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया का जिक्र कर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब सीमित भौगोलिक मुद्दा नहीं रह गई, बल्कि उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है।

🚫 एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध: विकासशील देशों के हितों की उठाई आवाज

जयशंकर ने ‘Unilateral Sanctions’ यानी एकतरफा प्रतिबंधों पर तीखा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UN Charter के खिलाफ लगाए गए दंडात्मक उपाय विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव की राजनीति संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। BRICS मंच पर यह बयान पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति पर भारत की कूटनीतिक असहजता को दर्शाता है।

🛡️ आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: सीमा पार आतंकवाद को बताया वैश्विक खतरा

आतंकवाद पर भारत ने अपना पारंपरिक लेकिन सख्त रुख दोहराया। जयशंकर ने कहा कि Cross-border Terrorism अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है और आतंकवाद के प्रति ‘Zero Tolerance’ एक सार्वभौमिक मानक होना चाहिए। भारत ने साफ किया कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जो कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

⚖️ यूएन सुधार अब अनिवार्य: UNSC में स्थायी सदस्यता की जोरदार मांग

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुधार का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियां दिखाती हैं कि मल्टीलेटरल सिस्टम कमजोर पड़ रहा है और UNSC Reform को अब और टाला नहीं जा सकता। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। पूरे भाषण का केंद्रीय संदेश यही था कि भारत टकराव के बजाय कूटनीति और समावेशी वैश्विक व्यवस्था का पक्षधर है।

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