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West Bengal News: बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य, सरकारी कर्मचारियों के लिए भी नया फरमान; शुभेंदु सरकार के 2 बड़े फैसले

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के बाद अब राज्य के भीतर संचालित होने वाले सभी मदरसों में भी दैनिक प्रार्थना के समय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को पूरी तरह से अनिवार्य घोषित कर दिया है। राज्य सरकार के शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर यह कड़ा आदेश दिया गया है। यह नया नियम सरकार से वित्तीय मदद पाने वाले (Aided) सरकारी और गैर-सरकारी (Private) सभी प्रकार के मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए समान रूप से लागू होगा। इस नए सरकारी आदेश के मुताबिक, मदरसों में सुबह की प्रार्थना के समय मौजूद सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को ‘वंदे मातरम्’ गाना पड़ेगा।

🔏 सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिखने व मीडिया में बोलने पर लगी रोक: कड़े नियमों की तुलना 1975 के आपातकाल से शुरू

मदरसों से जुड़े फैसले के अलावा राज्य सरकार का एक और नया प्रशासनिक आदेश आया है, जिसे लेकर राजनैतिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह आदेश सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के अभिव्यक्ति, बोलने और लिखने की संवैधानिक आजादी को सीमित करता है। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी सरकारी कर्मचारी अब उच्चाधिकारियों की बिना लिखित इजाजत के मीडिया के सामने बयानबाजी नहीं कर सकता। वे अखबारों, पत्रिकाओं या टीवी न्यूज चैनलों को अपना व्यक्तिगत इंटरव्यू भी नहीं दे सकते। यहाँ तक कि बिना अनुमति के सोशल मीडिया या पत्रिकाओं में लिखने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

इस नए फरमान के तहत कोई भी कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार की मौजूदा नीतियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना नहीं कर सकेगा। बुद्धिजीवियों और कर्मचारी संघों का कहना है कि सरकार का यह आदेश कर्मचारियों की आवाज दबाने वाले काले नियम जैसा है, जिसमें सरकारी स्कूलों-कॉलेजों के शिक्षक और प्रोफेसर भी शामिल हैं। विपक्ष और आम लोग इस नियम की तुलना साल 1975 के आपातकाल (Emergency) से कर रहे हैं। लोगों को डर है कि इससे प्रशासनिक सेंसरशिप बढ़ेगी और तंत्र के खिलाफ विरोध की हर जायज आवाज को दबा दिया जाएगा।

⚡ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के धड़ाधड़ कड़े फैसले: प्रशासनिक फेरबदल और टीएमसी नेताओं के खिलाफ जांच हुई तेज

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी है। मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ लेने के बाद से ही सीएम शुभेंदु अधिकारी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गए हैं। पिछले कुछ दिनों के भीतर उन्होंने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को बदलने के लिए कई बड़े और बेहद कड़े नीतिगत फैसले लिए हैं। इनमें दागी और विवादित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में बड़ा फेरबदल, कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़े कदम और पूर्ववर्ती टीएमसी (TMC) सरकार के नेताओं पर लगे कथित भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों की उच्च स्तरीय जांच से जुड़े त्वरित फैसले शामिल हैं।

💰 1 जून से शुरू होगी ‘अन्नपूर्णा योजना’: बंगाल की महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 3000 रुपये, ओबीसी आरक्षण में भी कटौती

इसी कड़ी में नई सरकार ने अपने प्रमुख चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाते हुए ‘अन्नपूर्णा योजना’ (Annapurna Yojana) को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना आगामी 1 जून से पूरे राज्य में लागू हो जाएगी, जिसके तहत बंगाल की पात्र महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन के लिए हर महीने सीधे उनके खातों में 3000 रुपये की सम्मान राशि मिलेगी।

इसके साथ ही, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक कार्ड खेलते हुए राज्य में ओबीसी (OBC) आरक्षण के कोटे को 17 फीसदी से भारी कटौती करते हुए महज 7 फीसदी कर दिया है। सरकार के इस नए संशोधन के बाद अब राज्य में केवल 66 विशिष्ट जातियां और पारंपरिक समुदाय ही ओबीसी आरक्षण के कानूनी दायरे में शामिल रहेंगे, जिससे बाकी जातियों को सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

🗺️ ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन केंद्र को सौंपी: उत्तर-पूर्व भारत की सुरक्षा होगी मजबूत

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor) में स्थित अपनी 120 एकड़ सरकारी जमीन को पूरी तरह से केंद्र सरकार को सौंप दिया है। यह बड़ा फैसला देश के इस संकरे हिस्से, जिसे ‘चिकन नेक’ (Chicken’s Neck) भी कहा जाता है, की सुरक्षा को अभेद्य व मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने (Fencing) और सैन्य बुनियादी ढांचे (Military Infrastructure) को तेजी से विकसित करने के उद्देश्य से लिया गया है। गौरतलब है कि यह बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही पूरे उत्तर-पूर्व भारत (North-East India) के सातों राज्यों को देश के बाकी मुख्य हिस्सों से भौगोलिक रूप से जोड़ता है, जिस पर चीन जैसे पड़ोसी देशों की हमेशा कुदृष्टि बनी रहती है।

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