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Mandsaur Mandi News: मंदसौर मंडी में प्याज के दाम ₹1 किलो तक गिरे; लागत तो दूर भाड़ा निकालना भी हुआ मुश्किल

मंदसौर: अपनी फसलों और उपज के लाभकारी व उचित दामों की लगातार मांग कर रहे अंचल के किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सरकार से राहत मिलने की बजाय अन्नदाता की परेशानियां दिन-प्रतिदिन और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामला मंदसौर की कृषि उपज मंडी से सामने आया है, जहां अब प्याज के औंधे मुंह गिरे दामों ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। मंडी में इन दिनों प्याज के दाम घटकर महज एक रुपये प्रति किलो के न्यूनतम स्तर तक रह गए हैं। इतने कम और निराशाजनक दामों के कारण किसानों को मुनाफा मिलना तो बहुत दूर की बात है, खेतों से मंडी तक फसल लाने का वाहन भाड़ा (ट्रांसपोर्टेशन खर्च) तक निकालना पूरी तरह नामुमकिन साबित हो रहा है। मंडी में मिल रहे इन कौड़ियों के दामों से क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी और गहरा आक्रोश व्याप्त है।

👨‍ी “लागत तो दूर, परेशानियों के सिवाय कुछ नहीं मिल रहा”—कम दामों के बीच आवक को लेकर किसानों और मंडी सचिव के दावों में मतभेद

मंडी पहुंचे पीड़ित किसानों का साफ तौर पर कहना है कि कम से कम इतनी कीमत तो उपज की मिलनी ही चाहिए जिससे उनकी वास्तविक लागत निकल सके और परिवार के भरण-पोषण के लिए थोड़ा बहुत लाभ मिल सके। वर्तमान में प्याज के जो दाम मिल रहे हैं, उसमें आर्थिक नुकसान और परेशानियों के अलावा किसानों के हाथ में कुछ भी नहीं आ रहा है। दाम बेहद कम होने के कारण अब कई किसानों ने मंडी में प्याज लाना कम कर दिया है, जिससे धरातल पर प्याज की आवक लगातार घटती जा रही है। हालांकि, दूसरी ओर इस पूरे मामले में विरोधाभास तब देखने को मिला जब मंडी सचिव ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि दामों में उतार-चढ़ाव के बावजूद मंडी में प्याज की आवक कम नहीं हुई है, बल्कि पिछले दिनों के मुकाबले आवक और ज्यादा बढ़ रही है। प्रशासन और किसानों के दावों में दिख रहा यह बड़ा अंतर अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

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