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J&K NIA Raid: जम्मू-कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई; शोपियां और श्रीनगर के कई ठिकानों पर छापेमारी

जम्मू-कश्मीर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार (25 मई) को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। एनआईए की टीमों ने सुबह तड़के ही जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाकों में एक साथ छापेमारी की। यह बड़ी कार्रवाई विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के दो स्थानों और राजधानी श्रीनगर के एक प्रमुख स्थान पर की जा रही है।

इस छापेमारी के दायरे में ‘दारुल उलूम सिराजुल उलूम’ शिक्षण संस्थान भी शामिल है, जिसे पिछले महीने ही प्रशासन द्वारा अवैध संस्था घोषित किया गया था। इसके साथ ही शोपियां में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख के आवास पर भी एनआईए की टीमों ने सघन तलाशी ली। सूत्रों के मुताबिक, आतंकवाद से जुड़े भूमिगत नेटवर्क, ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) और संदिग्ध टेरर-फंडिंग गतिविधियों पर पूरी तरह से शिकंजा कसने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस दौरान जमात-ए-इस्लामी (JeI) के पूर्व प्रमुख शहज़ादा औरंगज़ेब के आवास की गहराई से जांच की गई।

🏫 दारुल उलूम सिराजुल उलूम और संदिग्धों के ठिकानों की तलाशी: राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों के सहयोग से चला अभियान

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनआईए की विशेष टीमों ने शोपियां के इमाम साहिब इलाके में स्थित इस विवादित शिक्षण संस्थान में तड़के ही दबिश दी और तलाशी अभियान शुरू किया। यह संस्थान क्षेत्र में सैकड़ों छात्रों को धार्मिक और औपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान करने का काम करता है। इसके साथ ही श्रीनगर के अन्य चिन्हित ठिकानों पर भी एनआईए की कार्रवाई लगातार जारी है।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान घाटी में सक्रिय कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़े रिहायशी परिसरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी बारीकी से तलाशी ली जा रही है। कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए एनआईए की टीमों को जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CRPF) का पूरा जमीनी सहयोग मिल रहा है।

📋 युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और टेरर फंडिंग का आरोप: छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज जब्त

खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह देशव्यापी और प्रांतीय छापेमारी टेरर फंडिंग (Aatanki Funding) और कश्मीर घाटी में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले संदिग्ध नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ने के लिए की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन का गंभीर आरोप है कि कुछ धार्मिक व शैक्षणिक संस्थान और असामाजिक तत्व स्थानीय कश्मीरी युवाओं को गुमराह कर कट्टरपंथी बनाने (Radicalization) और प्रतिबंधित संगठनों के भारत-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जमीन तैयार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि आज की इस छापेमारी के दौरान संदिग्ध ठिकानों से कुछ बेहद अहम दस्तावेज, डायरियां और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की गई है, जिसकी जांच एनआईए के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है।

🔍 पिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कब-कब हुई NIA की बड़ी रेड? जानिए प्रमुख कार्रवाइयों का पूरा ब्योरा

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल और उनके मददगारों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) लगातार अभियान चला रही है। पिछले कुछ समय में हुई प्रमुख कार्रवाइयों का विवरण इस प्रकार है:

  • मार्च 2025: एनआईए ने जम्मू क्षेत्र के 12 प्रमुख ठिकानों पर आतंकी घुसपैठ और अंतरराष्ट्रीय साजिश मामले में छापेमारी की थी। यह कार्रवाई मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े स्थानीय नेटवर्क पर केंद्रित रही थी।

  • जून 2025: श्रीनगर, पुलवामा, बारामूला और अन्य संवेदनशील इलाकों में करीब 32 स्थानों पर टेरर फंडिंग और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के खिलाफ एनआईए की सबसे बड़ी रेड हुई थी, जिसमें कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे।

  • सितंबर 2025: जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई अन्य राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ छापेमारी कर नए आतंकी मॉड्यूल और संदिग्ध फंडिंग स्रोतों की गहन जांच की गई थी।

  • जनवरी 2026: शोपियां और अनंतनाग जिलों में सक्रिय आतंकियों के स्थानीय मददगारों और कोरियरों के खिलाफ एनआईए ने सख्त कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।

  • अप्रैल 2026: श्रीनगर और बारामूला में सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश और कट्टरपंथी सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े मामलों में एनआईए की बड़ी रेड हुई थी, जिसमें कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे।

🚫 जमात-ए-इस्लामी पर लगा बैन 5 साल के लिए बढ़ा: गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए बताया था बड़ा खतरा

सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर पर लगे प्रतिबंध को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया है और इसे एक पूर्णतः ‘गैर-कानूनी संगठन’ घोषित किया हुआ है। जमात-ए-इस्लामी पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों, अलगाववाद को बढ़ावा देने और भारत-विरोधी दुष्प्रचार में शामिल होने के पुख्ता आरोप हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने अपनी जांच में पाया था कि यह संगठन देश की आंतरिक सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ परदे के पीछे से अपनी संदिग्ध गतिविधियां जारी रखे हुए है, जिसके बाद इसके बैन की अवधि को आगे बढ़ाया गया। इस संगठन को सबसे पहले 28 फरवरी, 2019 को आधिकारिक रूप से ‘गैर-कानूनी संगठन’ घोषित किया गया था। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के तार सीमा पार बैठे आतंकवादी संगठनों के साथ बेहद करीबी रूप से जुड़े हैं और यह जम्मू-कश्मीर में लगातार उग्रवाद को बढ़ावा देने, युवाओं को भड़काने और भारतीय क्षेत्र के एक हिस्से को संघ से अलग करने की अलगाववादी मांगों का खुला समर्थन करता रहा है।

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