नारायणगढ़ में एक नाबालिग युवती की आत्महत्या से जुड़े मामले में सामने आए एक वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया है। आत्महत्या के बाद परिजनों की शिकायत पर हिमाचल पुलिस ने जीरो एफ.आई.आर. (Zero FIR) दर्ज की। इसके बाद पीड़िता के परिजन हिमाचल प्रदेश के एसपी से मिले और मीडिया के सामने अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शुरुआती स्तर पर दोनों राज्यों की पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है।
👮 पुलिस की भूमिका पर सवाल और गंभीर आरोप
परिजनों के अनुसार, आरोपियों के चंगुल से निकलने के बाद दोनों बहनें सबसे पहले हिमाचल प्रदेश की कालाआम्ब पुलिस चौकी पहुंची थीं। वहां उन्होंने घटना की पूरी जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायत पर तत्काल मामला दर्ज नहीं किया गया और उन्हें सढौरा थाने भेज दिया गया। परिजनों का दावा है कि सढौरा पुलिस ने भी क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का हवाला देकर उन्हें वापस हिमाचल की कालाआम्ब पुलिस चौकी भेज दिया। इस तरह न्याय के लिए दोनों बहनें लगातार भटकती रहीं।
⚖️ पीड़िता की बहन के सनसनीखेज दावे
मृतका की बहन द्वारा दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कालाआम्ब पुलिस चौकी में एक पुलिस कर्मचारी ने उसकी बहन को अलग कमरे में बैठाया था। शिकायत के अनुसार, करीब 40 से 45 मिनट बाद जब उसकी बहन बाहर आई, तो वह डरी हुई और मानसिक रूप से परेशान दिखाई दे रही थी। बहन का आरोप है कि मृतका ने बाद में बताया कि पुलिस कर्मचारी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया और इस बारे में किसी को कुछ न बताने की धमकी दी। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में नारायणगढ़ थाना प्रभारी ललित शर्मा ने कहा है कि हिमाचल से जीरो एफ.आई.आर. प्राप्त होने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
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