Lucknow Crime News: नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त; पुलिस कमिश्नर से मांगा जवाब
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में नाबालिग लड़कियों के गायब होने और अपहरण के बढ़ते मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इन मामलों में पुलिस की निष्क्रियता से नाराज इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
🔍 4 महीने से गायब है 12 साल की बच्ची
यह मामला 12 साल की एक नाबालिग बच्ची के पिता द्वारा दायर ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका’ (Habeas Corpus Petition) से जुड़ा है। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी चार महीने पहले लापता हुई थी, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। महीनों की देरी और पुलिस की लापरवाही से तंग आकर ही परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
🚫 कोर्ट की पुलिस को सख्त हिदायत
जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की सिंगल बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि नाबालिगों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि:
-
डीसीपी पूर्वी लंबित मामलों की समीक्षा करें और 3 दिन के भीतर रिपोर्ट दाखिल करें।
-
अगली सुनवाई (10 जून) पर डीसीपी पूर्वी अपने क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों (Investigating Officers) के साथ व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों।
-
कोर्ट ने पूछा है कि इतने लंबे समय बाद भी बच्ची का पता क्यों नहीं चल सका और पुलिस ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?
⚠️ पुलिस की साख पर सवाल
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहती है, तो कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करना पड़ेगा। राजधानी में लड़कियों की गुमशुदगी का बढ़ता ग्राफ और पुलिस का लचर रवैया प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.