Sukma News: आंधी-तूफान प्रभावितों को एक महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा; कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सुकमा: जिले में आए भीषण आंधी-तूफान और चक्रवात ने सैकड़ों गरीब परिवारों के आशियाने छीन लिए हैं। 28 मई को आई इस प्राकृतिक आपदा में लोगों के घर मलबे में तब्दील हो गए, लेकिन एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश परिवारों को सरकारी राहत राशि का इंतजार है। सर्वे होने के बावजूद आर्थिक सहायता न मिलने से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।
📉 प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठे सवाल
प्रभावित परिवारों का कहना है कि राजस्व विभाग द्वारा नुकसान का पंचनामा तैयार करने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासनों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून के आगमन के साथ ही इन परिवारों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जो लोग अपने घर खो चुके हैं, वे अब जर्जर ढांचों या खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को मजबूर हैं, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
⚖️ कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
जिला कांग्रेस कमेटी ने इस मामले में प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश लखमा और नेता हरीश कवासी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि यह प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला है। उन्होंने सात दिनों के भीतर राहत राशि के वितरण और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
🎯 कांग्रेस की प्रमुख मांगें
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अविलंब मुआवजा: सभी पात्र परिवारों को सात दिनों के भीतर राहत राशि दी जाए।
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आवास प्राथमिकता: पूरी तरह नष्ट हो चुके घरों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में प्राथमिकता दी जाए।
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समय-सीमा तय: भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के बाद 15 दिनों के भीतर राहत राशि वितरण की समय-सीमा अनिवार्य की जाए।
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दोषियों पर कार्रवाई: राहत वितरण में देरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जवाबदेही तय हो।
📢 आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर पीड़ित परिवारों को न्याय और सहायता नहीं मिली, तो पार्टी बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इन आपदा पीड़ितों की सुध लेता है और उन्हें राहत प्रदान करता है।
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