हजारीबाग: जिले का प्रसिद्ध ओकनी तालाब, जो करीब 14 एकड़ में फैला है, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। तालाब के पानी में बढ़ते प्रदूषण के कारण मछलियों, कछुओं और अन्य जलीय जीवों की भारी संख्या में मौत हो रही है। इस गंभीर स्थिति के बाद जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम की टीम ने संयुक्त रूप से निरीक्षण कर प्रदूषण के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी है।
🔍 प्रदूषण के प्रमुख कारण: कचरा और केमिकल का घातक प्रभाव
स्थानीय लोगों के अनुसार, तालाब के किनारे कूड़ा फेंकना, मवेशियों को बांधना और उनमें से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थ को सीधे तालाब में डालना मुख्य समस्या है। इसके अलावा, सिंघाड़े की खेती के लिए तालाब में डाले जा रहे केमिकल और कीटनाशकों ने जल को जहरीला बना दिया है। बदबू के कारण आसपास के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।
📋 जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई
प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने जलीय जीवों की मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही प्रशासन को सौंपी जाएगी। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त विपिन कुमार ने स्पष्ट किया है कि तालाब के आसपास अतिक्रमण करने वालों और गंदगी फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन तालाब की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
🤝 जनता का दायित्व: मेयर की अपील
हजारीबाग के मेयर अरविंद कुमार राणा ने आम नागरिकों से अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम घर-घर कचरा उठाने की व्यवस्था कर रहा है, फिर भी कुछ लोग तालाब के पास कचरा फेंक रहे हैं, जो गलत है। मेयर ने जनता से डस्टबिन के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया है ताकि शहर की ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।
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