Deoghar News: देवघर पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों और स्टाफ का घोर अभाव; 70-80 पशुओं का इलाज महज 2 लोगों के भरोसे
देवघर: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल तो अक्सर उठते रहे हैं, लेकिन अब देवघर के प्रांतीयकृत पशु चिकित्सालय की स्थिति ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्थिति यह है कि प्रतिदिन अस्पताल पहुँचने वाले दर्जनों मवेशियों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है।
🩺 महज दो लोगों के भरोसे इलाज
चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार के अनुसार, अस्पताल में पिछले एक वर्ष से कंपाउंडर और ड्रेसर के पद रिक्त हैं। वर्तमान में अस्पताल का पूरा दारोमदार केवल एक गार्ड और खुद उनके कंधों पर है। यहाँ प्रतिदिन 70 से 80 पशु इलाज के लिए लाए जाते हैं, लेकिन स्टाफ न होने के कारण कई पशुपालकों को मायूस होकर अपने पशुओं को वापस ले जाना पड़ता है, जिससे पशुओं की जान पर खतरा बना रहता है।
📊 स्वीकृत पद बनाम रिक्तियां
अवर पशुपालन पदाधिकारी डॉ. धनी लाल मंडल ने बताया कि जिले में पशु चिकित्सकों के पद तो भरे हैं, लेकिन कर्मचारियों की स्थिति बेहद दयनीय है। चपरासी और गार्ड के 15 स्वीकृत पदों में केवल 5 से 7 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर मानव बल की कमी से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
⚠️ पशुपालकों की बढ़ती मुश्किलें
देवघर जिले में 6 लाख से अधिक पंजीकृत मवेशी हैं। सरकार द्वारा किसानों और पशुपालकों को सुविधाएं देने के दावों के बीच, इन अस्पतालों में संसाधनों का अभाव बड़ा विरोधाभास पैदा करता है। यदि समय रहते आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई, तो पशुपालकों की आर्थिक स्थिति और मवेशियों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ेगा।
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