सावन में मनचाहा वर पाने के लिए शिव पूजा में न करें ये 4 भूलें, जानें हल्दी, सिंदूर और परिक्रमा के सही नियम
भक्ति और साधना का पावन सावन महीना चल रहा है। शास्त्रानुसार मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए सावन के महीने में मंगला गौरी और भगवान शिव की आराधना का विशेष विधान है।
इस दौरान कुंवारी कन्याएं व्रत रखकर विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं ताकि उन्हें सुयोग्य वर मिल सके। हालांकि, कई बार जानकारी के अभाव या अनजाने में पूजा के दौरान कुछ गलतियां हो जाती हैं, जिससे व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता।
कन्याओं को शिव पूजा के दौरान मुख्य रूप से 4 गलतियों से बचना चाहिए। यदि शास्त्रों में बताए गए सही नियमों का ध्यान रखकर पूजा की जाए, तो माता पार्वती और महादेव प्रसन्न होकर मनचाहा वर प्रदान करते हैं। इसलिए पूजा करते समय इन सूक्ष्म नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
🚫 हल्दी, सिंदूर, केतकी और तुलसी के प्रयोग से बचें, जानें अर्पित करने का सही तरीका
शिव पूजन के दौरान पूजन सामग्री का सही चयन होना बहुत आवश्यक है। सबसे पहली बात कि हल्दी और सिंदूर को कभी भी सीधे शिवलिंग पर अर्पित न करें।
हल्दी और सिंदूर स्त्री तत्व से संबंधित माने गए हैं, इसलिए इन्हें केवल माता पार्वती यानी गौरी पीठ पर ही अर्पित करना चाहिए, जलधारी या शिवलिंग पर नहीं। इसके अतिरिक्त केतकी के फूल और तुलसी पत्र का प्रयोग भी भगवान शिव की पूजा में पूरी तरह वर्जित (निषेध) माना गया है।
कई बार लड़कियां अज्ञानता में शिवलिंग पर सिंदूर या तुलसी पत्र चढ़ा देती हैं, जिससे हमेशा बचना चाहिए। माता पार्वती को सिंदूर व हल्दी चढ़ाएं, जबकि भगवान शिव को केवल शुद्ध जल, भस्म, बेलपत्र और चंदन अर्पित करें। इन बातों का ध्यान रखने से पूजा बिना किसी विघ्न के संपन्न होती है।
🌾 पूजा में कभी न चढ़ाएं खंडित सामग्री, अक्षत और बेलपत्र का रखें विशेष ध्यान
भगवान शिव की पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली प्रत्येक सामग्री की शुद्धता और अखंडता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पूजा में कोई भी खंडित सामग्री न चढ़ाएं; जैसे कि कटा-फटा बेलपत्र या टूटे हुए चावल (अक्षत) भूलकर भी अर्पित न करें। जो भी बेलपत्र आप महादेव को अर्पित कर रहे हैं, वह त्रिपत्र होना चाहिए और कहीं से भी कटा या छेद वाला नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार चावल के दाने पूरी तरह साबुत होने चाहिए।
पूजा में हमेशा स्वच्छ, ताजी और साबुत चीजों का ही प्रयोग करना चाहिए। खंडित वस्तुएं अर्पित करने से पूजा का फल निष्फल हो जाता है। इसलिए जल और पुष्प चढ़ाते समय पहले उन्हें अच्छी तरह से देख लें। जब आप पूर्ण श्रद्धा और पवित्र सामग्री से पूजन करती हैं, तो महादेव आपकी हर मनोकामना शीघ्र पूरी करते हैं।
🔄 शिवलिंग की आधी परिक्रमा का नियम समझें, जलधारी (सोमसूत्र) को कभी न लांघें
शिवलिंग पूजन समाप्त होने के बाद परिक्रमा करने का भी एक विशेष और अनिवार्य धार्मिक नियम होता है।
शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। पूजा के पश्चात हमेशा आधी परिक्रमा (अर्ध-परिक्रमा) ही करने का विधान है। परिक्रमा के दौरान जलधारी अथवा सोमसूत्र को कभी भी लांघना नहीं चाहिए। जहां से चढ़ाया हुआ जल बहकर बाहर निकलता है, उस स्थान को लांघना शास्त्रों में वर्जित और दोषपूर्ण माना गया है।
इसलिए परिक्रमा करते समय जलधारी तक जाकर पुनः उल्टे पांव वापस घूम जाना चाहिए। इस नियम का दृढ़ता से पालन करने से ही पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। यदि आप इन सभी धार्मिक नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करती हैं, तो मंगला गौरी और भगवान शिव की असीम कृपा से आपको मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।
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