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सोनीपत: जिस पिता ने बेटियों को बनाया टीचर, उसी के अंतिम दर्शन के लिए समय नहीं! ऑनलाइन पैसे भेजकर कराया अंतिम संस्कार

सोनीपत (हरियाणा): आज का समाज किस दिशा में अग्रसर हो रहा है, यह यक्ष प्रश्न तब और अधिक विकराल रूप धारण कर लेता है जब बच्चों के पास अपने जन्मदाता माता-पिता के अंतिम दर्शन तक का समय नहीं होता।

सोनीपत जिले से आधुनिक समाज और टूटते पारिवारिक मूल्यों की सच्चाई को उजागर करने वाला एक अत्यंत हृदय विदारक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ वृद्धाश्रम में रह रहे एक पूर्व कपड़ा व्यापारी ने अपनी बेटियों से मिलने की आतुरता में दम तोड़ दिया, परंतु बेटियां अपने पिता के अंतिम दर्शन हेतु भी नहीं पहुँच सकीं। वृद्धाश्रम में निधन के उपरांत उनके अंतिम संस्कार में परिवार का कोई भी सदस्य सम्मिलित नहीं हुआ।

🏬 महाराष्ट्र के बड़े कपड़ा व्यापारी थे शिवचरण गुप्ता, पत्नी के निधन के बाद आए थे वृद्धाश्रम

प्राप्त विवरण के अनुसार, मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले शिवचरण रतन गुप्ता अपने समय के एक प्रतिष्ठित व बड़े कपड़ा व्यापारी हुआ करते थे।

वे लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व अपनी धर्मपत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत स्थित वृद्धाश्रम में आए थे। उनका कोई पुत्र नहीं था, अतः उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर आत्मनिर्भर एवं कामयाब बनाया, जिनमें से दो बेटियां वर्तमान में अध्यापिका हैं। कुछ समय पूर्व उनकी पत्नी मीना गुप्ता का निधन हो गया था, जिसके बाद से वे अकेले ही वृद्धाश्रम में जीवन व्यतीत कर रहे थे।

📞 20 दिन पूर्व दी गई थी गंभीर बीमारी की सूचना, बीमार होते ही बेटियों ने बंद कर दिए फोन

वृद्धाश्रम के संचालक आनंद ने बताया कि लगभग 20 दिन पूर्व शिवचरण गुप्ता की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने उनकी तीनों बेटियों—अनीता, निशा और प्रिया को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया था।

इसके बावजूद तीनों बेटियों ने पारिवारिक व व्यक्तिगत व्यस्तताओं के बहाने बनाकर आने से मना कर दिया। आश्रम संचालक ने बताया कि पिता अपनी बेटियों से संवाद हेतु एक मोबाइल फोन रखते थे, परंतु बीमार पड़ते ही बेटियों की ओर से फोन आने पूरी तरह बंद हो गए थे और सूचना देने के बाद भी कोई मिलने नहीं आया।

📱 नेपाल, यूपी व मुंबई में रहती हैं बेटियां; ₹5100 ऑनलाइन भेजकर वीडियो कॉल पर देखा अंतिम संस्कार

शिवचरण गुप्ता की सबसे बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहकर अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं, मंझली बेटी निशा यूपी के आजमगढ़ में रहती हैं तथा सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में निवास करती हैं।

निधन के उपरांत बड़ी बेटी अनीता ने ऑनलाइन माध्यम से ₹5100 प्रेषित कर आश्रम संचालक से पिता का अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया। बेटियों ने अंतिम संस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया वीडियो कॉल (Video Call) के जरिए देखी। प्रारंभ में बेटियों ने अस्थियां सुरक्षित रखने को कहा था, परंतु बाद में समय का अभाव बताकर आश्रम संचालक को ही गंगा नदी में अस्थि विसर्जन करने के निर्देश दे दिए।

💔 धन-दौलत से ज्यादा बच्चों को संस्कार देना अनिवार्य, वृद्धाश्रम संस्था ने समाज को दिया संदेश

यह दुखद घटना केवल शिवचरण गुप्ता के परिवार की कहानी नहीं है, अपितु उस सामाजिक कड़वाहट की गवाही दे रही है जहाँ भौतिक संसाधनों की अंधी दौड़ में लोग अपनों के लिए समय खो चुके हैं।

शिवचरण गुप्ता ने जीवन में अपार धन अर्जित किया और बेटियों को उच्च पदों पर पहुँचाया, परंतु नैतिक संस्कारों के अभाव के कारण अंतिम समय में उन्हें एक-एक दर्शन के लिए तरसना पड़ा। अंतिम संस्कार संपन्न कराने वाले समाजसेवियों का कहना है कि वर्तमान युग में बच्चों को केवल करियर में सफल बनाने के स्थान पर नैतिक संस्कार और मानवीय संवेदनाएं सिखाना परम आवश्यक है।

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