नरवाना में आवारा कुत्तों का खौफनाक आतंक: एक ही दिन में 6 लोगों को काटा, नागरिक अस्पताल में इलाज न मिलने पर जींद रेफर
नरवाना (हरियाणा): हरियाणा के नरवाना शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल आम समस्या नहीं, अपितु आम नागरिकों के लिए सीधे जान का खतरा बन चुका है। शहर के पंजाबी चौक और आसपास के इलाकों में एक ही दिन में छह (6) लोगों को आवारा कुत्तों द्वारा अपना शिकार बनाए जाने की भयावह घटनाओं ने स्थानीय नगर परिषद और जिला प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।
🏥 एक ही दिन में 6 लोग हुए कुत्तों के शिकार, प्राथमिक उपचार न मिलने से मरीज जींद रेफर
मंगलवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर आवारा कुत्तों ने जमकर तांडव मचाया।
घटना में गोपाल, प्रीति, बलबीर सैनी, कमलेश, नीलम मुंजाल तथा नरेंद्र मुंजाल की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। पंजाबी चौक निवासी नरेंद्र मुंजाल की पत्नी को कुत्ते ने बुरी तरह काट लिया, जिसके पश्चात परिजन उन्हें तत्काल नरवाना के नागरिक अस्पताल लेकर पहुँचे। किंतु अस्पताल में पर्याप्त इंजेक्शन और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होने के कारण उन्हें जींद के बड़े अस्पताल रेफर करना पड़ा।
🐕 बीरबल नगर और मॉडल टाउन सहित कई इलाकों में खौफ, घरों में कैद रहने को मजबूर बच्चे व बुजुर्ग
बीरबल नगर, पतराम नगर, मॉडल टाउन और हरि मंदिर पंजाबी चौक सहित नरवाना के विभिन्न मोहल्लों में आवारा कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड बेखौफ घूम रहे हैं।
स्थानीय निवासी निशा रानी और अंजलि ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कुत्तों के लगातार बढ़ते खौफ के कारण छोटे बच्चे घरों से बाहर खेलने में डर रहे हैं और बुजुर्ग सैर पर निकलने से घबरा रहे हैं। राहगीरों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए लंबे रास्ते बदलने को बाध्य होना पड़ रहा है।
😡 नागरिक अस्पताल की बदहाली और नगर परिषद की निष्क्रियता से उबला मोहल्लावासियों का गुस्सा
आवारा कुत्तों के अनियंत्रित आतंक को लेकर नरवाना के नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है।
स्थानीय निवासी ऋषि मुंजाल ने आरोप लगाया कि पंजाबी चौक में दो-दो पार्षद होने के बावजूद इस जनसमस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि पूर्व में भी अनेक बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, किंतु न तो कुत्तों की नसबंदी का अभियान चला और न ही उन्हें पकड़ने की ठोस व्यवस्था की गई।
❓ ‘क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है प्रशासन?’— मीडिया से ही बची है अंतिम उम्मीद
नागरिक अस्पताल में कुत्ते के काटने (Anti-Rabies) का समुचित इलाज न मिलने से स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध भारी रोष व्याप्त है।
आक्रोशित जनता ने तीखा प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि, “यदि एक ही दिन में छह निर्दोष लोग आवारा कुत्तों का शिकार हो गए हैं, तो क्या जिला प्रशासन और नगर परिषद किसी गंभीर जनहानि या बड़ी अनहोनी की प्रतीक्षा कर रहे हैं?” लाचार नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें केवल मीडिया के माध्यम से ही शासन-प्रशासन के जागने की आस बची है।
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