Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
पीथमपुर में स्थापित हुआ आधुनिक ईवी प्लांट: सालाना बनेंगी 5000 इलेक्ट्रिक बसें भोपाल के जेपी अस्पताल में हज-2027 की तैयारियां तेज: मेडिकल स्क्रीनिंग और फिटनेस जांच शुरू सागर जहरीली शराब कांड पर पूर्व सीएम का तीखा हमला: मंत्री गोविंद राजपूत पर लगाए गंभीर आरोप अनाज के दानों से विदेशी मेहमानों का अनोखा स्वागत: नर्मदापुरम के किसान ने दिखाई अनूठी कला MP Barrier Free Tolling: देवास-भोपाल कॉरिडोर पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू, FASTag और कैमरों से ऑटोमैटिक क... Ladli Behna Yojana 40th Installment: 13 सितंबर को आगर-मालवा से 40वीं किस्त जारी करेंगे सीएम मोहन याद... Indore Police Bravery: इंदौर में धू-धू कर जली कार, ट्रैफिक पुलिस टीम ने कांच तोड़कर चालक को निकाला; ... Jabalpur News: 4 साल पहले तोड़ा स्कूल भवन, आज तक नहीं बनी छत; पेड़ के नीचे और आंगनबाड़ी में पढ़ने को... Jabalpur News: कीचड़ भरे रास्ते पर तड़पकर हुई डिलीवरी, गुस्साए पूरे गांव ने फावड़ा उठाकर खुद बना डाल... जबलपुर में बेलगाम डंपर का कहर: मंदिर से घर लौट रही महिला शिक्षिका को कुचला, इलाज के दौरान मौत

Indore Cancer Hospital: 43 करोड़ की लीनियर एक्सेलेरेटर मशीन बारिश में भीगी, सिविल वर्क अधूरा होने से अटका इंस्टॉलेशन

इंदौर (मध्य प्रदेश): शासकीय कैंसर अस्पताल में लंबे इंतजार के बाद अत्याधुनिक लीनियर एक्सेलेरेटर और रेडियोथेरेपी डेडिकेटेड सीटी मशीन पहुंच तो गई है, लेकिन जरूरतमंद मरीज इसका लाभ कब ले पाएंगे, यह अब तक तय नहीं हो सका है।

लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत वाली यह अत्याधुनिक मशीन जिस रेडियोथेरेपी विभाग में स्थापित की जानी है, वहां का बुनियादी सिविल निर्माण कार्य ही अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण एजेंसी ने आधी-अधूरी इमारत के कमरों में ही इन संवेदनशील मशीनों के बक्सों को असुरक्षित तरीके से रख दिया है। हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के चलते कमरों में पानी रिसने से मशीन के महत्वपूर्ण बक्से भीग गए हैं, जिससे करोड़ों रुपये की आधुनिक 4D प्लानिंग मशीनों के तकनीकी रूप से क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। जहां मशीन रखी जानी है, वहां उसका बेस प्लेटफॉर्म तक तैयार नहीं किया गया है।

💧 रेडियोथेरेपी विभाग के TPS रूम में भरा पानी: बंकर की छत से टपक रहा पानी

अधूरे निर्माण और लापरवाही की स्थिति:

  • पीआईयू की सुस्त कार्यप्रणाली: भवन निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (PIU) के पास है, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रेडियोथेरेपी डिपार्टमेंट का ढांचा अब तक अधूरा है।

  • टीपीएस कक्ष प्रभावित: जिस ट्रीटमेंट प्लानिंग सिस्टम (TPS) रूम में मशीन संचालन से जुड़े मुख्य कंप्यूटर और संवेदनशील सर्वर लगाए जाने हैं, वहां छत से बारिश का पानी भर गया है।

  • बंकर की छत से रिसाव: जिस मुख्य बंकर में लीनियर एक्सेलेरेटर मशीन लगाई जानी है, वहां दीवारों और छत का प्लास्टर तक नहीं हुआ है, जिसके चलते लगातार पानी टपक रहा है।

  • इंजीनियरों का काम बाधित: मशीन स्थापित करने आई अधिकृत एजेंसी ‘वेरियन मेडिकल सिस्टम्स’ (Varian Medical Systems) के तकनीकी विशेषज्ञों का कार्य भी बुनियादी निर्माण पूरा न होने के कारण पूरी तरह रुक गया है।

📦 खुले कमरों में भीग रहे मशीनों के बॉक्स: मार्च 2027 तक टला मरीजों को लाभ

समय-सीमा और संभावित जोखिम:

  • महंगी तकनीक पर लापरवाही का साया: बड़ी जद्दोजहद और बजट आवंटन के बाद कैंसर अस्पताल को यह जीवनरक्षक मशीनरी उपलब्ध हुई थी, परंतु प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसे सुरक्षित रखना ही चुनौती बन गया है।

  • छत से टपक रहा पानी: जिन कमरों में लकड़ी और गत्ते के विशाल पैकेट्स में मशीन रखी गई है, वहां सीधे छत से पानी टपक रहा है, जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं।

  • समय-सीमा बढ़ी: पूर्व में अनुमान लगाया जा रहा था कि इस वर्ष के अंत तक कैंसर पीड़ितों को इस आधुनिक रेडिएशन तकनीक की सुविधा मिलने लगेगी, परंतु मौजूदा गतिरोध को देखते हुए अब मार्च 2027 से पहले मरीजों को इसका लाभ मिलना संभव नहीं दिख रहा।

💸 फंड की कमी और 17 करोड़ का बकाया: 36 लाख के अभाव में ट्रांसफार्मर का काम अटका

वित्तीय बाधाएं और प्रशासनिक पेंच:

  • ठेकेदार का बकाया: लीनियर एक्सेलेरेटर मशीन के इंस्टॉलेशन और सिविल वर्क की धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य कारण बजट की अनुपलब्धता बताई जा रही है।

  • 17 करोड़ का इंतजार: निर्माण का जिम्मा संभाल रही पीआईयू यूनिट को संबंधित प्रशासनिक विभाग से 17 करोड़ रुपये की बकाया राशि मिलने की प्रतीक्षा है।

  • बिजली कनेक्शन लंबित: मशीन के सुचारु संचालन के लिए एक उच्च क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मर की स्थापना अनिवार्य है, जिसके लिए मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (MPEB) को 36 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है। फंड का अभाव होने के कारण यह कार्य भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.