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HSVP Plot Scam: ओस्टिज कोटे में फर्जी आवंटन पर ACB का बड़ा एक्शन, 2 रिटायर्ड IAS समेत 9 पर FIR दर्ज

गुड़गांव (हरियाणा): हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) में फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग का एक और गंभीर मामला सामने आया है।

हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ओस्टिज कोटा (विस्थापित कोटा) के तहत दो बेशकीमती भूखंडों के नियमों के विपरीत गलत आवंटन मामले में दो सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारियों समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।

यह जांच जून 2024 में कन्हई गांव निवासी एक जागरूक नागरिक द्वारा प्रस्तुत की गई औपचारिक शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें उच्चाधिकारियों और भू-माफिया की सांठगांठ की परतें खुली हैं।

📜 हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर जारी किया अलॉटमेंट: 200 की जगह दे दिया 220 वर्ग मीटर का प्लॉट

सेक्टर-40 भूखंड आवंटन की पृष्ठभूमि:

  • 1994 का मूल आवेदन: जांच रिपोर्ट के अनुसार, सिविल लाइंस निवासी जगदीश चंद्र गुप्ता ने 12 जुलाई 1994 को ओस्टिज कोटे के अंतर्गत प्लॉट के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। ड्रॉ में उन्हें सेक्टर-40 स्थित 200 वर्ग मीटर का प्लॉट नंबर 833-ए आवंटित हुआ।

  • एनओसी के अभाव में अटका आवंटन: मूल भूमि के अन्य सह-खातेदारों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जमा न कर पाने के कारण विभाग ने उस समय उन्हें आधिकारिक आवंटन पत्र (Allotment Letter) जारी नहीं किया।

  • पत्नी का दावा हुआ था खारिज: 7 सितंबर 2015 को आवेदक की पत्नी सुभाष रानी उर्फ सुशीला ने पति की मृत्यु की सूचना देकर प्लॉट अपने नाम करने की मांग की, जिसे तत्कालीन सक्षम अधिकारियों ने नई विज्ञप्ति जारी होने पर आवेदन करने की शर्त के साथ खारिज कर दिया।

  • अदालत का रुख: इस अस्वीकृति के विरुद्ध दायर याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया था।

🤝 तत्कालीन मुख्य प्रशासक और अधिकारियों की मिलीभगत: बिना 10% राशि जमा किए किया खेल

सांठगांठ और नियम विरुद्ध प्रक्रिया:

  • अधिकारियों का गठजोड़: हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद 15 मई 2019 को तत्कालीन मुख्य प्रशासक डी. सुरेश, प्रशासक गिरीश कुमार और जिला अटॉर्नी अनिल कुमार अग्रवाल ने कथित मिलीभगत की।

  • बढ़ाकर दिया भूखंड: पंचकूला अर्बन ब्रांच के अधीक्षक नितिन हुड्डा के माध्यम से 24 मई 2019 को 200 वर्ग मीटर के पात्र आवेदक को नियमों को ताक पर रखकर 220 वर्ग मीटर का आवंटन पत्र जारी कर दिया गया।

  • अनिवार्य राशि भी नहीं ली गई: इस प्रक्रिया के लिए विभाग द्वारा निर्धारित अनिवार्य 10 प्रतिशत की अग्रिम धरोहर राशि तक जमा नहीं कराई गई।

📍 सेक्टर-39 में भी दोहराया गया खेल: श्याम सिंह को थमाया 100 वर्ग गज का भूखंड

दूसरा फर्जीवाड़ा और प्रमुख अभियुक्त:

  • सेक्टर-39 का मामला: जांच में ऐसा ही दूसरा गैरकानूनी मामला सेक्टर-39 के भूखंड नंबर 257-ए (चार मरला/100 वर्ग गज) में पाया गया।

  • हाईकोर्ट के विरुद्ध आवंटन: यहां भी हाईकोर्ट के प्रतिकूल आदेश के बावजूद श्याम सिंह नामक व्यक्ति को 29 मई 2019 को ओस्टिज कोटे के तहत अवैध रूप से प्लॉट अलॉट कर दिया गया।

  • नौ लोगों पर शिकंजा: एसीबी की विस्तृत रिपोर्ट के बाद पूर्व आईएएस डी. सुरेश, पूर्व आईएएस गिरीश कुमार, तत्कालीन जिला अटॉर्नी अनिल कुमार और अधीक्षक नितिन हुड्डा समेत नौ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

💸 अलॉटमेंट मिलते ही बेचे प्लॉट: सरकार को लगी 4 करोड़ से अधिक के राजस्व की चपत

राजस्व हानि और पूर्व प्रकरण:

  • तुरंत कर दी बिक्री: एसीबी के जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी सुभाष रानी और श्याम सिंह को जैसे ही अवैध आवंटन पत्र प्राप्त हुए, उन्होंने बिना समय गंवाए उन भूखंडों को ऊंचे दामों पर तीसरे पक्षों को बेचकर मुनाफा कमा लिया।

  • करोड़ों का नुकसान: अधिकारियों के अनुसार, यदि केवल सेक्टर-40 के भूखंड की पारदर्शी ई-नीलामी कराई जाती, तो राज्य सरकार के खजाने को लगभग 4 करोड़ रुपये का सीधा राजस्व प्राप्त होता।

  • आईएएस डी. सुरेश पर पहले भी मामले: इस वर्ष अगस्त माह में प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए पूर्व आईएएस डी. सुरेश के खिलाफ एसीबी गुरुग्राम में पहले से तीन अलग-अलग भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं।

  • सेक्टर-23 का पूर्व विवाद: इससे पूर्व सेक्टर-23 में जब्त किए गए एक अन्य भूखंड को भी अवैध तरीके से आवंटित करने के मामले में उन्हें आरोपी बनाया जा चुका है।

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