Inspirational Story: गाजियाबाद का घरौंदा बाल आश्रम बना मिसाल; 100 बच्चे जा चुके विदेश, 1000 को मिला अपना परिवार
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित घरौंदा बाल आश्रम में पिछले कुछ सालों से रह रहे दो मासूम बच्चों की किस्मत बदल गई है। इन दोनों बच्चों को गोद (Adopt) लेने की इच्छा फ्रांस और इटली के दो विदेशी परिवारों ने जताई है। आश्रम से मिली जानकारी के अनुसार, विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत दोनों बच्चों को गोद देने की समस्त कानूनी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब फ्रांस और इटली से दोनों परिवार करीब एक महीने बाद गाजियाबाद आकर बच्चों को अपने साथ ले जाएंगे।
👦 8 साल के मासूम को इटली और 6 साल के बच्चे को फ्रांस का परिवार मिला: जानिए कैसे पहुंचे थे आश्रम
घरौंदा बाल आश्रम के संचालक ओंकार सिंह ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर एक बच्चा लावारिस हालत में मिला था।
उसके परिजनों की काफी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी न मिलने पर उसे देखभाल के लिए आश्रम लाया गया। नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उसे नया परिवार मिला है। इस 8 वर्षीय बच्चे को इटली के एक परिवार ने गोद लिया है, जो वर्तमान में पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। वहीं, दूसरा बच्चा जिसकी उम्र 6 वर्ष है, करीब एक साल पहले कविनगर इलाके से मिला था। उसे फ्रांस के एक परिवार ने गोद लिया है।
संचालक ने बताया कि आश्रम के माध्यम से अब तक करीब 100 बच्चे देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी दत्तक (Adoptive) परिवारों तक सकुशल पहुंच चुके हैं।
🔍 विदेश जाने के बाद 2 साल तक ली जाएगी जानकारी: आश्रम की टीम करेगी फॉलोअप
विदेशी परिवारों को सौंपे जाने के बाद भी आश्रम की ओर से इन दोनों बच्चों की सुरक्षा और देखभाल पर सतर्कता से नजर रखी जाएगी।
संचालक ने बताया कि बच्चों को सौंपने के बाद अगले दो वर्षों तक उनका नियमित फॉलोअप (Follow-up) लिया जाएगा। इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान यह देखा जाता है कि बच्चा नए माहौल और नए परिवार में ठीक से ढल रहा है या नहीं तथा उसकी सही तरीके से देखभाल हो रही है या नहीं।
👨👩👧👦 1,000 बच्चों को वास्तविक परिजनों से मिला चुका है आश्रम: परिजनों का पता न चलने पर शुरू होती है गोद देने की प्रक्रिया
आश्रम के संचालक ओंकार सिंह के मुताबिक, घरौंदा बाल आश्रम अब तक करीब 1,000 गुमशुदा व असहाय बच्चों को खोजकर उनके वास्तविक (बायोलॉजिकल) परिजनों से मिला चुका है।
आश्रम में आने वाले हर बच्चे की शिनाख्त और उसके परिवार की तलाश के लिए पुलिस व बाल कल्याण समिति (CWC) के नियमों का पालन किया जाता है। गहन प्रयासों के बावजूद जिन बच्चों के वास्तविक माता-पिता या परिजनों का कोई अता-पता नहीं चल पाता, केवल उन्हीं बच्चों को कानूनी रूप से गोद देने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
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