Arjun Munda Press Conference: भूमि अधिनियम के उल्लंघन और अवैध निर्माण को लेकर सरकार श्वेत पत्र जारी करे – अर्जुन मुंडा
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा ने जमीन की रजिस्ट्री के दौरान जमीन का नेचर (स्वरूप) बदले जाने का एक बेहद गंभीर आरोप राज्य सरकार पर लगाया है। उन्होंने खुलकर कहा है कि झारखंड सरकार संविधान के प्रावधानों और नियमों को तोड़ रही है। यदि सरकार ऐसा नहीं मानती है, तो उसे इस पूरे मामले पर तुरंत एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करना चाहिए। जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में एक विशेष प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड में भूमि अधिनियम का धड़ल्ले से हो रहे उल्लंघन और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए।
📝 अवैध तरीके से जनजातीय और कृषि भूमि पर कब्जा, प्रशासनिक मिलीभगत से सक्रिय हैं भू-माफिया
पूर्व मंत्री ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि अवैध तरीकों से जनजातीय और कृषि योग्य भूमि पर कब्जा किया जा रहा है और वहां तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। अनुसूचित क्षेत्रों में लगातार कानून और प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के हालिया फैसलों का विशेष संदर्भ भी दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक मिलीभगत के बिना यह सब संभव नहीं है और भू-माफिया पूरी तरह सक्रिय होकर अवैध रूप से रजिस्ट्री के वक्त जमीन का नेचर बदलवा रहे हैं, जो एक अति गंभीर मामला है।
🏢 कानून को ताक पर रखकर कृषि भूमि पर हो रहे बहुमंजिला भवनों का निर्माण
अर्जुन मुंडा ने आगे कहा कि कृषि योग्य उपजाऊ भूमि की रजिस्ट्री कराते समय उसका स्वरूप बदलकर वहां अवैध रूप से बहुमंजिला भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है, जो सरासर कानून का उल्लंघन है। पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे तमाम अवैध निर्माणों को तुरंत ध्वस्त किया जाना चाहिए और उनके आवंटन को भी तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से डोबो क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि ग्रामीण पंचायती क्षेत्र में लगातार बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। केवल यह तर्क देना कि जमीन गैर-आदिवासी की है, किसी को भी उस पर मनमाने ढंग से बहुमंजिला निर्माण करने की अनुमति नहीं देता है।
🐘 दलमा पहाड़ी के आसपास वन्यजीवों और हाथी कॉरिडोर पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
पूर्व मंत्री ने अनुसूचित क्षेत्र में भूमि उपयोग से जुड़े नीतिगत फैसले लेते समय केवल जमीन के मालिकाना स्वरूप को ही नहीं, बल्कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के मूल उद्देश्यों, स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन को भी प्राथमिकता से ध्यान में रखने की बात कही। अर्जुन मुंडा ने प्रसिद्ध दलमा पहाड़ी के आसपास तेजी से हो रहे अनियंत्रित निर्माण कार्यों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दलमा क्षेत्र वन्यजीवों, विशेष तौर पर हाथियों के आवागमन के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। हाथी कॉरिडोर से जुड़े गंभीर विषयों और पर्यावरणीय संतुलन को ताक पर रखकर विकास कार्य करना उचित नहीं है।
⚠️ भूमि अतिक्रमण और विवादों के कारण तेजी से बढ़ रही हैं आपराधिक गतिविधियां
अपने संबोधन के अंत में अर्जुन मुंडा ने कहा कि भूमि अतिक्रमण की इन घटनाओं के कारण क्षेत्र का जनसांख्यिकीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है, जिससे ग्राम सभाओं, पंचायतों और ‘पेसा’ (PESA) कानूनों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि भूमि विवादों के चलते जमशेदपुर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में आपराधिक गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। जस्टिस भैरवा और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने इन सभी बिगड़ी हुई परिस्थितियों के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
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