Vineet Manocha Murder Case: जेल में बंद बेटे सुब्रत को सजा हुई तो किसे मिलेगी प्रापर्टी? बहू शालू और पोते के अधिकार साफ
कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में एक तरफ जहां बहू शालू 21 दिन जेल में बिताने के बाद बाहर आ चुकी है, वहीं वारदात के 19 दिन बाद गिरफ्तार किया गया बेटा सुब्रत मिनोचा फिलहाल जेल में बंद है. पुलिस पूछताछ में उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है. इस सनसनीखेज घटना के बाद अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह खड़ा हो गया है कि 60 से 70 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाले दिवंगत दवा कारोबारी विनीत मनोचा की अकूत संपत्ति और करोड़ों के कारोबार का असली वारिश कौन होगा.
⚖️ हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25: हत्या के आरोपी को संपत्ति से अयोग्य ठहराने का प्रावधान
कानून के जानकारों के अनुसार, यदि बेटे सुब्रत को पिता की हत्या के मामले में दोषी ठहराया जाता है, तो संपत्ति का गणित पूरी तरह बदल जाएगा. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि किसी व्यक्ति की हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने वाला उत्तराधिकारी मृतक की संपत्ति पाने के अयोग्य हो जाता है. वहीं धारा 27 के तहत ऐसे व्यक्ति के संबंध में उत्तराधिकार की गणना ऐसे की जाती है मानो वह मृतक से पहले ही मर चुका हो, यानी उसे प्रापर्टी में कोई हिस्सा नहीं मिलेगा.
👩👦 क्या बहू शालू और पांच साल के पोते को मिलेगा संपत्ति पर अधिकार?
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश शुक्ला का कहना है कि आरोपी शालू मृतक विनीत मिनोचा की बहू हैं, इसलिए केवल उनके आधार पर उन्हें ससुर की संपत्ति का सीधा वारिस नहीं माना जा सकता. वहीं, पांच साल के बच्चे के अधिकार इस बात पर निर्भर करेंगे कि कानूनी उत्तराधिकार की स्थिति क्या बनती है और क्या विनीत मनोचा ने अपने जीवनकाल में कोई वैध वसीयत छोड़ी थी या नहीं. यदि सुब्रत कानूनी रूप से अयोग्य घोषित होता है, तब उत्तराधिकार के नियमों के तहत आगे के फैसले तय होंगे.
🏛️ सुब्रत के बरी होने पर क्या होंगी परिस्थितियां? कानूनी जानकारों की राय
शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित का मानना है कि इस मामले में अभी संपत्ति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, क्योंकि यदि सुब्रत को सजा होती भी है तो उसके पास उच्च अदालतों में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा. वहीं, यदि ट्रायल कोर्ट सुब्रत को हत्या के आरोपों से बरी कर देता है, तो उसे उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता और ऐसी स्थिति में संपत्ति का बंटवारा सामान्य कानूनी प्रावधानों या वैध वसीयत के आधार पर ही किया जाएगा.
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