Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Rakesh Agarwal IAS Case: अलमारी के ताले टूटे, गैस फैलाकर सबूत मिटाने की कोशिश, पुलिस जांच में जुटे क... Ujjain Demolition and Security News: शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम जारी, 40 मजदूर त... Jabalpur High Court Paddy Scam Hearing: मध्य प्रदेश के 34 करोड़ के धान घोटाले पर हाईकोर्ट में सुनवाई... Guna Unique Coin Collection: गुना के अजय जैन के पास है मौर्य और मुगल काल के 2000 से अधिक प्राचीन सिक... Mona Lisa Birth Certificate MP High Court Verdict: इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मोनालिसा के पहले जन... Kaushalya Devi Sany Bhajan: रामधुनी में मंजीरा बजाती नजर आईं मुख्यमंत्री की पत्नी, डिप्टी सीएम विजय ... Kanker Collector Mandri Dance: सेवा संकल्प शिविर में ग्रामीणों के साथ झूमे कलेक्टर कुंदन कुमार, वीडि... Pregnant Woman Death in Korba: दीपिका बस्ती निवासी महिला ने तोड़ा दम, परिजनों की गुहार अनसुनी करने क... Madhya Pradesh Health Crisis: उकवा क्षेत्र के सुंदरवाही गांव में मातम, राहुल गांधी आज मृत बच्चों के ... Rahul Gandhi Balaghat Visit: राहुल गांधी के आदिवासी दौरे पर सियासत तेज, भाजपा के आरोपों पर जीतू पटवा...

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से हिला हेल्थकेयर सेक्टर: अस्पताल स्टॉक्स में 6% तक की भारी गिरावट

शेयर बाजार में 30 सितंबर का कारोबारी सत्र देश के प्रमुख कॉरपोरेट अस्पतालों के लिए भारी गिरावट भरा साबित हुआ। दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर वसूले जा रहे अप्रत्याशित और मनमाने मुनाफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बेहद तल्ख टिप्पणी के बाद शीर्ष अस्पताल कंपनियों के शेयरों में 6 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

शीर्ष अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की कि किस तरह इनडोर और आउटडोर मरीजों को अस्पताल के ही आंतरिक मेडिकल स्टोर से अत्यधिक महंगे दामों पर दवाएं खरीदने के लिए विवश किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अमानवीय व्यवस्था और भारी मुनाफे के चलते आम नागरिक और मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह पिस रहे हैं।

⚖️ ‘2,700 की कैंसर दवा 27,000 में बेची जा रही’: सुप्रीम कोर्ट ने मुनाफाखोरी को बताया ‘नरसंहार’

दवाओं की कीमतों पर अदालत के सख्त बोल:

  • पीठ की तल्ख टिप्पणी: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने दवाओं की मूल्य निर्धारण नीति पर सुनवाई करते हुए अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग किया।

  • शवों को रोकने पर नाराजगी: अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते, यहां तक कि बिल भुगतान न होने की स्थिति में परिजनों को शव तक सुपुर्द नहीं करने के मामले सामने आते हैं।

  • कैंसर की दवा का उदाहरण: खंडपीठ ने चौकाने वाला उदाहरण देते हुए रेखांकित किया कि किस प्रकार ₹2,700 की लागत वाली जीवनरक्षक कैंसर दवा मरीजों को ₹27,000 की अत्यधिक कीमत पर बेची जा रही है। अदालत ने इस अनियंत्रित मुनाफाखोरी को ‘नरसंहार’ (Carnage) करार दिया।

📊 किन-किन अस्पतालों के शेयर हुए धड़ाम: अपोलो, मैक्स, फोर्टिस और KIMS में बिकवाली

बाजार में हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों का हाल:

  • अपोलो हॉस्पिटल्स, यथार्थ और मैक्स: सुबह के शुरुआती कारोबार में अपोलो हॉस्पिटल्स, यथार्थ हॉस्पिटल और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में 4 से 6 प्रतिशत तक की जोरदार बिकवाली देखने को मिली।

  • फोर्टिस, KIMS और एस्टर डीएम: फोर्टिस हेल्थकेयर के शेयर 5.2 प्रतिशत, कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) के शेयर 3.8 प्रतिशत और एस्टर डीएम हेल्थकेयर के शेयर 4.2 प्रतिशत नीचे लुढ़क गए।

  • सेक्टोरल इंडेक्स पर दबाव: प्रमुख शेयरों में गिरावट के चलते निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1 प्रतिशत और बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2 प्रतिशत तक गिरकर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

💊 दवाओं पर 16% एक समान मार्जिन तय करने का सुझाव: केंद्र सरकार से मांगा जवाब

दवा मूल्य नियंत्रण पर अदालत का प्रस्ताव:

  • 16% फिक्स मार्जिन का सवाल: सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्यों न सभी प्रकार की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर 16 प्रतिशत का एक समान लाभ मार्जिन (Uniform Margin) अनिवार्य कर दिया जाए?

  • जरूरी व गैर-जरूरी का भेद खत्म हो: अदालत का मानना था कि दवाओं को आवश्यक और गैर-आवश्यक श्रेणियों में बांटकर मुनाफाखोरी की खुली छूट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि अंततः इसका सीधा वित्तीय बोझ करदाताओं और मरीजों की जेब पर ही पड़ता है।

  • सॉलिसिटर जनरल की सहमति: केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत की चिंताओं को वाजिब ठहराते हुए सहमति जताई कि यह एक गंभीर जनहित का विषय है और वे इस संदर्भ में संबंधित नीति-निर्माताओं तथा अधिकारियों से विमर्श करेंगे।

💰 अस्पतालों की कुल आय और मुनाफे पर क्या पड़ेगा असर: जानिए विश्लेषकों की राय

वित्तीय प्रभाव और आगामी सुनवाई का विवरण:

  • आय का 20 से 35% हिस्सा दवाओं से: मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों के कुल राजस्व का लगभग 20 से 35 प्रतिशत हिस्सा आंतरिक फार्मेसी और मेडिकल कंस्युमेबल्स की बिक्री से प्राप्त होता है।

  • फार्मेसी आधारित अस्पतालों पर अधिक मार: वित्तीय ब्रोकरेज बोनान्ज़ा के रिसर्च एनालिस्ट नितांत दरेकर के अनुसार, यदि 16 प्रतिशत की मार्जिन सीमा प्रभावी होती है, तो अपोलो, मैक्स, एस्टर डीएम, मेदांता और फोर्टिस जैसे व्यापक रिटेल फार्मेसी नेटवर्क वाले अस्पतालों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर बड़ा असर पड़ेगा। इनमें सबसे बड़ा रिटेल नेटवर्क होने के कारण अपोलो सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है।

  • क्लिनिकल अस्पतालों को कम नुकसान: नारायण हृदयालय और जुपिटर लाइफ लाइन जैसे क्लिनिकल ऑपरेशंस पर अधिक केंद्रित अस्पतालों पर इस संभावित नियम का असर अपेक्षाकृत सीमित रहेगा।

  • 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई: वर्तमान में यह केवल अदालत का एक सुधारात्मक सुझाव है और कोई अंतिम विधिक आदेश पारित नहीं हुआ है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.