Bhagalpur News: शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, कागजों पर बनी ‘तनुश्री’ नाम की काल्पनिक शिक्षिका और डकार लिए 52 लाख
भागलपुर के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग की नाक के नीचे कागजों पर ‘तनुश्री’ नाम की एक पूरी तरह से काल्पनिक (फर्जी) शिक्षिका की बहाली दिखा दी गई। बिना किसी वास्तविक विद्यालय में तैनाती के इस अदृश्य शिक्षिका के नाम पर सरकारी खजाने से लगातार वेतन जारी होता रहा और जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 52 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश होते ही पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
इस मामले का संज्ञान लेते हुए जोगसर थाने में 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मुख्य आरोपी संविदा कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में ले लिया है, जबकि डीपीओ (DPO) शशि चंद चौधरी से भी जोगसर थाने में गहन पूछताछ की जा रही है।
🕵️♂️ कैसे रची गई साजिश? बर्खास्तगी के बाद खुला राज
इस पूरे फर्जीवाड़े के तार जिला शिक्षा कार्यालय की स्थापना शाखा में पूर्व में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी और संचिका प्रभारी की मिलीभगत से जुड़े हैं।
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ऑपरेटर की बर्खास्तगी: कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज के कामकाज में भारी अनियमितताएं दिखने पर स्थानीय शिक्षकों ने इसका विरोध जताया था। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) चंदन कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे सेवा से मुक्त (बर्खास्त) कर दिया था।
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फाइलों की पड़ताल में खुलासा: ऑपरेटर के हटने के बाद जब कार्यालय की फाइलों की गहन पड़ताल शुरू हुई, तो काल्पनिक शिक्षिका ‘तनुश्री’ के नाम से वेतन निकासी का पूरा खेल पकड़ा गया। संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक से पूछताछ की गई तो उन्होंने लिखित हलफनामा देकर साफ कर दिया कि उनके विद्यालय में ‘तनुश्री’ नाम की कोई भी शिक्षिका कभी नियुक्त ही नहीं हुई थी।
💳 फर्जी PAN, PRAN और बैंक अकाउंट से खेला गया खेल
जालसाजों ने सरकारी सिस्टम को चकमा देने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था:
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फर्जी PRAN और खाता: बर्खास्त कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज ने किसी अज्ञात व्यक्ति के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर तनुश्री के नाम से फर्जी प्राण (PRAN – Permanent Retirement Account Number) जनरेट करवा लिया और उसी के आधार पर फर्जी बैंक खाता खुलवा लिया।
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वेतन बिल में हेरफेर: हर महीने जब असली शिक्षकों का वेतन भुगतान बिल ट्रेजरी भेजा जाता था, तो फाइल में चालाकी से तनुश्री का नाम और बैंक खाता नंबर जोड़ दिया जाता था।
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मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच लगभग 52 लाख रुपये फर्जी खाते में भेजे गए, जिन्हें आरोपियों ने तुरंत निकाल लिया।
🛑 73 लाख की तीसरी कोशिश में पकड़ा गया पूरा फर्जीवाड़ा
आसानी से पैसे मिलने के बाद आरोपियों के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने अगस्त 2026 में 46 लाख रुपये की एक और बड़ी राशि उसी खाते में ट्रांसफर करवा ली। लेकिन, असामान्य ट्रांजैक्शन देखकर बैंक ने उस खाते को तुरंत होल्ड (फ्रीज) कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने 73 लाख रुपये की तीसरी भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करने की कोशिश की, जिसे बैंक ने सिरे से रिजेक्ट कर दिया और इस प्रकार पूरा घोटाला उजागर हो गया।
प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने पुष्टि की है कि मामले में 6 नामजद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हिरासत में लिए गए संविदा कर्मी अविनाश राज, उसकी पत्नी और संचिका प्रभारी की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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