Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Nalkheda Temple Security: एसपी दिलीप कुमार सोनी ने किया पुलिस चौकी का शुभारंभ, लंबे समय की मांग हुई ... Chitrakoot News Today: कानपुर से दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, ड्राइवर को... Balaghat News Today: 2009 से फर्जी मेडिकल डिग्री पर दे रहा था सेवा, बिरसा में पूर्व बीएमओ के खिलाफ प... Durga Puja Ranchi Update: त्योहारी सीजन में नगर निगम कर्मचारियों के अल्टीमेटम से बढ़ी मुश्किलें, जयप... Surajpur Crime News: जयनगर में मां और 12वीं के छात्र बेटे की संदिग्ध हालत में मिली लाश, इलाके में फै... Kunkuri Elephant Attack Panic: महागिरजाघर और होली क्रॉस अस्पताल परिसर में पहुंचा लोनर हाथी, दहशत में... Bhilai Student Suicide: अस्थि विसर्जन में नहीं ले जाने से नाराज था छात्र, जामुल थाना क्षेत्र में घर ... Dongargarh Double Murder: राजनांदगांव में मां-बेटे की बेरहमी से हत्या, गंभीर रूप से घायल बेटी अस्पता... Bastar Dussehra 2026: बस्तर दशहरे की अनूठी परंपरा, दंतेश्वरी मंदिर में कलश स्थापना के साथ जलाई गई अख... Hazaribagh Fire News: बड़ा बाजार के मोटरसाइकिल शोरूम में लगी भीषण आग, लाखों के वाहन जलकर खाक

Saharanpur News: शिवालिक की वादियों में स्थित सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर, नवरात्र पर उमड़े लाखों भक्त

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शिवालिक पहाड़ियों की मनोरम और शांत वादियों के बीच बसा सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर देश भर के लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ सहारनपुर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान से लाखों की संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस सिद्धपीठ की सबसे अनूठी विशेषता मां शाकंभरी देवी का स्वरूप है, जिन्हें अन्न, वनस्पति और जीवन का पोषण करने वाली आदिशक्ति माना जाता है। मंदिर में माता को पारंपरिक मिठाइयों के स्थान पर हरी शाक-सब्जियों का भोग लगाने की विशेष परंपरा है, जो धरती को भीषण अकाल और जल संकट से उबारने की पौराणिक कथा की याद दिलाती है।

🛕 भूरादेव के दर्शन के बिना अधूरी है यात्रा और मंदिर की भौगोलिक स्थिति

मां शाकंभरी देवी का यह ऐतिहासिक मंदिर सहारनपुर जिले की बेहट तहसील के जसमौर क्षेत्र में स्थित है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर शिवालिक पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है।

  • बाबा भूरादेव का मंदिर: मुख्य मंदिर से करीब 1 किलोमीटर पहले बाबा भूरादेव का मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु मुख्य मंदिर से पहले बाबा भूरादेव के दर्शन नहीं करते, उनकी यह यात्रा और पूजा संपूर्ण नहीं मानी जाती तथा उन्हें माता का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। भूरादेव को माता का रक्षक और इस क्षेत्र का क्षेत्रपाल माना जाता है।

📜 पौराणिक कथा: क्यों पड़ा माता का नाम ‘शाकंभरी’?

पौराणिक आख्यानों के अनुसार, प्राचीन काल में दुर्गमासुर नामक एक प्रतापी दैत्य के बढ़ते अत्याचारों के कारण वर्षा होनी बंद हो गई थी, जिससे पूरी धरती पर भयानक अकाल और सूखा पड़ गया। अन्न और जल के अभाव में मनुष्य, पशु-पक्षी और तमाम जीव-जंतु तड़प-तड़पकर मरने लगे। इस महासंकट से मुक्ति पाने के लिए ऋषि-मुनियों और देवताओं ने आदिशक्ति की कठोर तपस्या की।

  • उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुईं देवी ने अपनी दिव्य शक्ति से पूरे भूभाग पर शाक (हरी सब्जियां), फल और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां उत्पन्न कीं, जिससे सभी जीवों का पोषण हुआ और अकाल समाप्त हुआ।

  • हरी सब्जियों और शाक को उत्पन्न कर संसार का भरण-पोषण करने के कारण ही माता का नाम ‘शाकंभरी’ पड़ा। इसके पश्चात माता ने देवताओं को प्रताड़ित करने वाले महादैत्य दुर्गमासुर का वध कर संपूर्ण संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया।

🎪 हरी सब्जियों का भोग और भव्य नवरात्र मेले का आयोजन

जहां देश के लगभग सभी मंदिरों में देवी-देवताओं को मिठाइयों और पकवानों का भोग लगाया जाता है, वहीं मां शाकंभरी के दरबार में ताजी हरी सब्जियों का भोग चढ़ाया जाता है। यह अनूठी परंपरा माता के अन्नपूर्णा और पोषणकर्ता स्वरूप के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। इस सिद्धपीठ में वर्ष में दो बार—चैत्र नवरात्र (वासंतिक नवरात्र) और शारदीय नवरात्र—पर विशाल लक्खी मेलों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान पूरे शिवालिक क्षेत्र में माता के जयकारों, भजन-कीर्तन, मुंडन संस्कारों और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.