FSSAI Strict Action: भारतीय बाजार में FSSAI की कड़ी सख्ती, पनीर से लेकर शराब तक की हो रही है बारीकी से जांच
देश का कंज्यूमर बाजार करीब 200 लाख करोड़ रुपये का है, जिस पर अब भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपनी पकड़ और सख्ती दोनों बढ़ा दी है। बाजार में बिकने वाले पनीर से लेकर शराब की बोतलों तक की गहनता से जांच की जा रही है। इसके साथ ही रेस्टोरेंट की साफ-सफाई से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स तक, हर जगह नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इस बड़े एक्शन का कंपनियों की कमाई पर तुरंत भले ही कोई बहुत बड़ा असर न पड़े, लेकिन इससे उनका कारोबार करने का खर्च तेजी से जरूर बढ़ रहा है।
🍾 शराब ब्रांड्स और झूठे दावों वाली कंपनियों पर सबसे तगड़ा असर
FSSAI की इस सख्ती की सबसे पहली और बड़ी गाज शराब कंपनियों पर गिरी है:
-
शराब कंपनियों पर कार्रवाई: नियमों का पालन न करने के कारण यूनाइटेड स्पिरिट्स और पेरनोड रिकार्ड जैसे नामी ब्रांड्स को अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करना पड़ा है। पुरानी बोतलों के दोबारा इस्तेमाल के नियमों के उल्लंघन पर बेंगलुरु फैसिलिटी से हजारों पेटियां जब्त की गईं, जिससे स्मिरनॉफ, वैट 69 और अन्य ब्रांड्स प्रभावित हुए हैं।
-
भ्रामक दावों पर रोक: एफएमसीजी सेक्टर में भी उन कंपनियों पर शिकंजा कसा गया है जो अपने प्रोडक्ट्स के सौ फीसदी शुद्ध होने का दावा करती थीं। नियमों के बाद कई बड़ी कंपनियों को अपने ‘नेचुरल’ या ‘प्रीमियम’ दावों को लेकर नोटिस मिले हैं और उन्हें अपनी पैकेजिंग व टेस्टिंग पर भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है।
🍔 फूड आउटलेट्स और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर रडार
खाने-पीने के शौकीनों और बाहर का खाना खाने वालों के लिए भी यह एक्शन बेहद अहम है:
-
आउटलेट्स सील: खराब चिकन और एक्सपायरी कुकिंग ऑयल मिलने के बाद मंगलुरु में केएफसी आउटलेट सील कर दिया गया। वहीं महाराष्ट्र में जुबिलेंट फूडवर्क्स के डोमिनोज और सैफायर फूड्स के पिज्जा हट आउटलेट्स के लाइसेंस भी सस्पेंड किए गए हैं।
-
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स: अमेज़ॅन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी सरकार के रडार पर आ गए हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि शुरुआत में यह लागत कंपनियां और बाजार खुद उठाएंगे, लेकिन अंत में इस सख्ती और बढ़ी हुई टेस्टिंग फीस का सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है, जिससे सुरक्षित खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ सकते हैं।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.