चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब पीसीएस (PCS) मुख्य परीक्षा 2026 के परिणामों में उजागर हुई भारी गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बेहद तीखा प्रहार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मान को पंजाब के मासूम युवाओं के भविष्य और करियर के साथ खिलवाड़ करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तरुण चुघ ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि इस पूरी चयन प्रक्रिया की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तत्काल प्रभाव से चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए तथा जांच पूरी होने तक सभी संबंधित दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
तरुण चुघ का तंज— बिना पैसे और सिफारिश के नौकरी देने का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में क्यों उठ रहे हैं बार-बार भर्ती पर सवाल?
तरुण चुघ ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) बिना किसी पैसे या सिफारिश के पारदर्शी तरीके से नौकरियां देने का दावा कर सत्ता में आई थी, आज उसी सरकार के राज में पंजाब की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिस सीएम ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को उज्जवल भविष्य के बड़े-बड़े सपने दिखाकर सत्ता हासिल की थी, उन्हीं के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक होने, चयन प्रक्रिया में धांधली होने और मनमाने ढंग से अनियमितताएं सामने आने के आरोप लग रहे हैं। चुघ ने कड़े शब्दों में पूछा कि आखिर भगवंत मान को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पंजाब के होनहार युवाओं के साथ यह अन्याय और शोषण कब तक जारी रहेगा?
परीक्षा में शामिल न होने वालों के चयन और एक ही केंद्र से भारी संख्या में उम्मीदवारों के शॉर्टलिस्ट होने जैसे गंभीर आरोप
चुघ ने आगे कहा कि 4 नवंबर की देर रात घोषित किए गए PPSC PCS मुख्य परीक्षा के परिणामों ने पूरे पंजाब राज्य को हिलाकर रख दिया है। अभ्यर्थियों की ओर से यह गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिन उम्मीदवारों ने वास्तव में परीक्षा दी ही नहीं थी, उनके रोल नंबर भी सफल अभ्यर्थियों की सूची में धड़ल्ले से दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, एक ही परीक्षा केंद्र से 24.21 प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन होना, 86 उम्मीदवारों के लगातार 3 या 4 रोल नंबरों के समूहों में शॉर्टलिस्ट होना और कुछ खास परीक्षा कक्षों से 10 से 11 उम्मीदवारों का चयनित होना जैसे मामलों ने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है। विज्ञापित 331 पदों के मुकाबले साक्षात्कार के लिए केवल 751 उम्मीदवारों को ही बुलाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि तय नियमों के अनुसार कम से कम 3 गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए था। क्या यह सब महज एक इत्तेफाक है या फिर रोल नंबर के आवंटन से लेकर परीक्षा केंद्रों के निर्धारण तक किसी सोची-समझी व्यवस्था के तहत खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया? इन तमाम गंभीर सवालों का जवाब अब भगवंत मान सरकार को देना ही होगा।
मेहनत और योग्यता को पीछे धकेलकर सिफारिश और सेटिंग को बढ़ावा देने का आरोप, युवाओं के विश्वास पर सीधा प्रहार
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार ने पंजाब की धरती पर कड़ी मेहनत और योग्यता को पूरी तरह पीछे धकेल दिया है, जिससे हर भर्ती में सिफारिश और कथित सेटिंग की आशंकाएं मजबूत हुई हैं। पंजाब का युवा दिन-रात एक करके कठिन परिश्रम करता है, गरीब परिवार अपनी जमीनें बेचकर, जमा-पूंजी और भविष्य की सारी उम्मीदें बच्चों की पढ़ाई पर लगाते हैं, लेकिन जब परिणाम आता है तो उन्हें पता चलता है कि परीक्षा में बैठे बिना ही लोगों के चयन के दावे सामने आ रहे हैं। यह केवल कोई साधारण प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह पंजाब की युवा पीढ़ी के अटूट विश्वास पर एक सीधा और घातक हमला है।
केवल PPSC ही नहीं, बल्कि PSSSB, फार्मेसी ऑफिसर और नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षाओं में भी सामने आ चुके हैं घोटाले के मामले
तरुण चुघ ने यह भी याद दिलाया कि PPSC का यह मामला कोई इकतीसवां या इकलौता विवाद नहीं है, बल्कि इससे पहले भी PSSSB ग्रुप-B भर्ती परीक्षा में शीर्ष 100 अभ्यर्थियों में से 22 उम्मीदवारों का अकेले बठिंडा से होना, कुछ खास पारिवारिक संबंध होना और मेरिट सूची में फर्जी प्रविष्टियां पाए जाने जैसे गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान पेन कैमरा, ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हाई-टेक नकल गिरोह के भंडाफोड़ होने की घटनाएं भी जगजाहिर हैं, जिसके चलते माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 454 पदों की चयन प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए इसकी जांच CBI को सौंपने के संबंध में राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। इसके अलावा नायब तहसीलदार, कृषि विकास अधिकारी और PSEB की परीक्षाओं में भी लगातार विवाद रहे हैं। आखिर कितने पेपर लीक और घोटालों के बाद मुख्यमंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे?
विपक्ष में रहते हुए इस्तीफा मांगने वाले भगवंत मान आज अपनी सरकार में उठ रहे सवालों पर क्यों साधे हुए हैं पूरी तरह चुप्पी?
चुघ ने तंज कसते हुए कहा कि जो भगवंत मान कल तक विपक्ष में बैठकर हर छोटे-बड़े परीक्षा विवाद पर दूसरों से इस्तीफे की मांग किया करते थे, आज वे खुद अपने ही शासनकाल में लगातार उठ रहे इन गंभीर सवालों पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं। मुख्यमंत्री को जनता को बताना चाहिए कि जब उनके राज में बार-बार परीक्षाओं की निष्पक्षता तार-तार हो रही है, तब तक सरकार के किसी भी बड़े राजनीतिक पदाधिकारी ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी क्यों नहीं ली? क्या पंजाब के युवाओं के भविष्य की कोई कीमत नहीं बची है? क्या एक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी सरकार को बेदाग और ईमानदार साबित करने तक ही सिमट कर रह गई है?
जांच पूरी होने तक साक्षात्कार प्रक्रिया रोकने और विभिन्न विवादित भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की पुरजोर मांग
तरुण चुघ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच पंजाब पुलिस या राज्य सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली किसी भी स्थानीय एजेंसी से कराना कतई न्यायसंगत नहीं होगा, क्योंकि इस बार सवाल सीधे तौर पर सरकार की कार्यशैली और उसकी प्रशासनिक मशीनरी पर खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि PPSC परीक्षा के सभी उत्तर पत्र, उपस्थिति रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल लॉग, रोल नंबरों का आवंटन, परीक्षा केंद्रों की पूरी जानकारी और मूल्यांकन का सारा रिकॉर्ड तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया जाए। जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और साथ ही PSSSB, फार्मेसी ऑफिसर, नायब तहसीलदार तथा अन्य सभी विवादित परीक्षाओं की भी उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
युवाओं के साथ हुए विश्वासघात के बाद मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं, तत्काल इस्तीफा दें भगवंत मान
अंत में तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से उनके पद से तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि पंजाब के युवाओं के साथ इतना बड़ा और वीभत्स विश्वासघात होने के बाद मुख्यमंत्री अपनी जवाबदेही से किसी भी कीमत पर बच नहीं सकते हैं। भगवंत मान को अपनी कुर्सी की चिंता करने के बजाय प्रदेश के युवाओं के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। आम आदमी पार्टी की सरकार ने रोजगार देने का बड़ा वादा किया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि राज्य के युवाओं को अपनी ही व्यवस्था पर से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने कहा कि पंजाब के नौजवानों को अब खोखले जुमले और दावे नहीं, बल्कि ठोस न्याय चाहिए। भारतीय जनता पार्टी इस मुश्किल घड़ी में प्रदेश के हर उस छात्र और अभ्यर्थी के साथ मजबूती से खड़ी है, जिसकी मेहनत और योग्यता के साथ अन्याय हुआ है। इस पूरे प्रकरण की दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए CBI जांच होनी चाहिए, तमाम दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए और मुख्यमंत्री भगवंत मान को नैतिक आधार पर तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
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