March 16, 2026 12:25 am
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मुंबई की सड़कों से Ola-Uber और Rapido गायब, जानें क्यों अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए

मुंबई में ओला, उबर और रैपिडो के हजारों ड्राइवरों ने कम कमाई और बेहतर सुविधाओं की मांग को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण और ऐप कंपनियों के कमीशन से ड्राइवरों की इनकम बहुत कम हो चुकी है. यही कारण है कि उन्होंने हड़ताल का रास्ता चुना है. अचानक हुई इस हड़ताल के कारण मुंबई में आम लोगों के लिए ट्रैवल करना भारी मुश्किल हो चुका हे.

ड्राइवरों की मुख्य मांगें हैं कि काली-पीली टैक्सियों के समान किराये, बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध, और एक मजबूत कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए. सरकार की तरफ से अभी तक एक स्पष्ट नीति नहीं बनाए जाने से भी ड्राइवरों में गुस्सा है. ड्राइवरों का साफ कहना है कि बढ़ती फ्यूल की कीमतों के कारण उनको कुछ भी नहीं बच पा रहा है.

उबर, ओला और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों के एक ग्रुप की तरफ से 15 जुलाई को सेवाएं बंद करने के बाद, मुंबई भर में हजारों यात्री लंबे इंतजार और कैब न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं.

इस हड़ताल की शुरुआत कैसे हुई?

इन ट्रैवल ऐप पर काम करने वाले ड्राइवरों में कम कमाई को लेकर असंतोष उपजा है. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट जोन, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी और दक्षिण मुंबई जैसे क्षेत्रों कम कमाई हो पा रही है. ड्राइवरों का आरोप है कि एग्रीगेटर कमीशन और फ्यूल खर्च जोड़ने के बाद उनकी आय केवल 8 से 12 रुपये प्रति किलोमीटर रह जाती है. ड्राइवरों ने कहा कि यह कमाई, खासकर फ्यूल और रखरखाव के बढ़ते खर्च को देखते हुए, टिकाऊ नहीं है.

क्या हैं ड्राइवरों की मुख्य मांगें?

इस हड़ताल का नेतृत्व महाराष्ट्र गिग कामगार मंच,महाराष्ट्र राज्य राष्ट्रीय कामगार संघ और भारतीय गिग वर्कर्स फ्रंट सहित कई संस्थाओं की तरफ से किया जा रहा है. ड्राइवरों की मांग है कि कैब का किराया काली-पीली टैक्सियों के बराबर ही किया जाए. इसके साथ ही ड्राइवरों के हित के लिए कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए.

ड्राइवरों ने प्लेटफ़ॉर्म द्वारा दी जाने वाली छूट पर भी चिंता जताई है, उनका कहना है कि इन छूटों की लागत अक्सर उनकी कमाई से काट ली जाती है. वे चाहते हैं कि प्लेटफ़ॉर्म छूट का बोझ ड्राइवरों पर डालने के बजाय उसे वहन करें.

ऐलान के बाद भी नहीं हुईं गाइडलाइन जारी

महाराष्ट्र में एग्रीगेटर्स नीति की घोषणा एक साल पहले की गई थी. हालांकि अब तक इसे लागू नहीं किया गया है. इसमें किराया, लाइसेंसिंग समेत कई गाइडलाइन का मसौदा तैयार है, लेकिन इसे अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है. यही कारण है कि ड्राइवरों में ऐप आधारित प्लेटफॉर्म को लेकर विवाद सामने आया है.

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