February 24, 2026 1:05 pm
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गणेश जी के पूर्व जन्म की कथा क्या है, जानते हैं आदिदेव कब-कब अवतरित हुए

भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य देवता हैं. देवों के देव महादेव और माता पार्वती की सबसे छोटी संतान भगवान गणेश का वाहन मूषक है. गणेश जी सभी बाधाओं को दूर करने वाले और सौभाग्य लाने वाले देवता हैं. गणेश को अक्षरों और बुद्धि के देवता माना जाता हैं. उनका विवाह ब्रह्मा जी की पुत्रियों रिद्धि-सिद्धि से हुआ था, जिससे उनकी शुभ-लाभ संतान हुई.

साल 2025 में गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 27 अगस्त, बुधवार के दिन मनाया जाएगा. इस दिन पर विशेष रूप से भगवान गणेश जी पूजा-अर्चना की जाती है. गणेश जी को आदिदेव भी कहा जाता है क्योंकि वे विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और देवताओं के प्रथम पूज्य हैं.

गणेश जी स्वयं अनादि और अनंत हैं, जो विभिन्न युगों में अलग-अलग रूपों में अवतरित हुए, और शिव-पार्वती के पुत्र के रूप में उनका जन्म उनका एक विशेष अवतार था और उन्हें महागणपति अवतार एक रूप है. पुराणों के अनुसार, गणेश जी ने अलग-अलग युगों में विभिन्न अवतार धारण किए हैं.

साथ ही कई बार भगवान गणेश के पूर्व जन्म की बात करें तो यह भी कहा गया है कि भगवान गणेश आदिदेव हैं, जो अनादि हैं और उनका कोई पूर्व जन्म नहीं है. गणेश जी को महागणपति का अवतार माना जाता है, सतयुग में उनका जन्म ऋषि कश्यप और माता अदिति के पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे, वहीं त्रेतायुग में गणेश जी का जन्म माता उमा के गर्भ से गुणेश के रूप में हुआ था.

गणेश जी के जन्म की सबसे प्रचलित कथा

सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, गणेश जी का जन्म माता पार्वती द्वारा अपनी मैल (उबटन) से किया गया था, जब उन्होंने उन्हें अपने द्वारपाल के रूप में नियुक्त किया. इसके बाद भगवान शिव के साथ हुए संघर्ष में उनका सिर कट गया, और फिर शिव जी ने उन्हें हाथी का सिर प्रदान किया, जिससे वे गजानन के रूप में जाने गए. यह कथा शिव पुराण, गणेश पुराण और अन्य ग्रंथों में मिलती है.

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