February 24, 2026 10:59 pm
ब्रेकिंग
वनांचल क्षेत्रो के विकास को नई रफ्तार सभी वर्ग व क्षेत्रो का समावेश- विधायक गोमती साय Dog Bite Death: आवारा कुत्ते के काटने से डरे बैंक कर्मचारी ने किया सुसाइड, छोड़ा सुसाइड नोट Amit Shah Bihar Visit: सीमांचल में डीएम-एसपी की अहम बैठक करेंगे अमित शाह, जानें पूरा एजेंडा विवादों में लव स्टोरी: 60 साल के प्रिंसिपल संग भागकर रचाई शादी, 3 दिन बाद ही मां बन गई शाइस्ता! Crime News: पति की हत्या कर ब्लीचिंग पाउडर और नमक से ड्रम में शव गला रही थी पत्नी Jharkhand News: एयर एंबुलेंस क्रैश में जान गंवाने वाला मरीज संजय कौन था? जानें पूरी कहानी Weather Update: दिल्ली-NCR में बढ़ा तापमान, यूपी-बिहार समेत 10 राज्यों में गर्मी का अलर्ट Ramadan 2026- साल में दो बार आएगा रमजान का महीना? जानिए कब बनेगा ऐसा दुर्लभ संयोग और क्या है इसके पी... Paneer Shimla Mirch Recipe: शेफ कुनाल कपूर स्टाइल में बनाएं पनीर-शिमला मिर्च की सब्जी, उंगलियां चाटत... Kashmir Encounter News: घाटी में आतंक का अंत! 'ऑपरेशन त्रासी' के तहत सैफुल्ला सहित 7 दहशतगर्द मारे ग...
महाराष्ट्र

रिटायरमेंट, जन्मदर और इस्लाम… संघ शताब्दी समारोह में मोहन भागवत की 10 बड़ी बातें

संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली में तीन दिनों तक आरएसएस का कार्यक्रम चला. विज्ञान भवन में 26 से 28 अगस्त तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में हजारों लोगों की मौजूदगी रही. इस कार्यक्रम का विषय था ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’. इस कार्यक्रम का उद्देश्य संघ के विचारों, उद्देश्यों और सामाजिक योगदान को समाज के सामने रखना था.

इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन हुआ. कार्यक्रम के पहले दो दिन उन्होंने लोगों को संबोधित किया जबकि तीसरे दिन लोगों के सवालों के जवाब दिए. इस दौरान उनसे नई शिक्षा नीति, नेताओं के रिटायरमेंट प्लान, काशी मथुरा आंदोलन, संघ-बीजेपी में कोऑर्डिनेशन जैसे कई सवाल पूछे गए. ऐसे में आइए जानते हैं कि संघ शताब्दी समारोह के आखिरी दिन मोहन भागवत की 10 बड़ी बातें…

मोहन भागवत की 10 बड़ी बातें

  1. तकनीक और आधुनिकीकरण के युग में संस्कार और परम्पराओं को लेकर पूछे गए सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा में तकनीक और आधुनिकता का विरोध नहीं लेकिन एटिकेट्स जरूरी है. उन्होंने कहा कि तकनीकी मनुष्य की गुलाम रहे मनुष्य तकनीकी का गुलाम ना बने इसलिए शिक्षा आवश्यक है. शिक्षा केवल जानकारी रटना नहीं है. इसका उद्देश्य मनुष्य को संस्कारवान बनाना है. नई शिक्षा नीति लाना जरूरी था. नई शिक्षा नीति में पंचकोशीय शिक्षा यानी पांच-स्तरीय समग्र शिक्षा का प्रावधान है.
  2. उन्होंने कहा कि सुना है आज कल नौकरियों में ड्रिंकिंग एटिकेट्स सिखाए जाते हैं, जो विदेश सेवा के कार्यक्षेत्र में काम करते हैं. हो सकता है उनको इसकी जरूरत पड़ती हो क्योंकि विदेशों में ऐसा चलन हो लेकिन इसको जनरलाइज करने की क्या आवश्यकता है. हम अंग्रेज नहीं हैं हमें अंग्रेज नहीं बनना लेकिन ये एक भाषा है और भाषा सीखने में कोई दिक्कत नहीं है.
  3. अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने जन्म दर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कम से कम तीन संतानें होनी चाहिए. जिनकी तीन संतानें नहीं हुई, वो लुप्त हो गए. उन्होंने कहा कि डॉक्टर बताते हैं कि तीन संतान पैदा करने से तीनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है. साथ ही एडजस्ट करना भी सीख लेते हैं. इसलिए बच्चे तीन होने चाहिए और उससे अधिक होना नहीं चाहिए.
  4. 75 साल में रिटायरमेंट प्लान पर मोहन भागवत ने कहा कि 75 साल में रिटायर होने की जरूरत नहीं है. न मैं रिटायर होऊंगा, न किसी को रिटायर होने के लिए कहूंगा. हम जब तक चाहें, काम कर सकते हैं. मैंने ये बात मोरोपंत जी के बयान का हवाला देते हुए उनके विचार रखे थे. मैंने ये नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए.
  5. बीजेपी और संघ में कोऑर्डिनेशन की कमी वाले सवाल पर भागवत ने कहा कि हम हर सरकार में अच्छा समन्वय रखते हैं. मतभेद के कोई मुद्दे नहीं है. हमारे बीच मतभेद हो सकते है लेकिन मनभेद नहीं होते. सबकुछ संघ तय करता है ये बिल्कुल गलत है. बीजेपी अपना फैसला खुद लेती है. उन्होंने आगे कहा कि अच्छे काम के लिए जो हमसे सहायता मांगते हैं हम उन्हें सहायता देते हैं.
  6. घुसपैठियों पर रोक को लेकर भागवत ने कहा कि परमिशन लेके आना चाहिए नहीं मिलता तो नहीं आना चाहिए. बिना परमिशन के आना गलत है. इसको रोकना चाहिए. सरकार रोक रही है. अपने देश का रोजगार अपने देश के लोगों को मिलना चाहिए. हमारे देश में भी मुसलमान लोग हैं. उनकी नौकरी धंधा भी प्रभावित होती है.
  7. संघ पर मिलिटेंट होने के आरोप लगते हैं. इस सवाल पर भागवत ने कहा कि आरोप तो लगाते हैं और सालों से लगते हैं लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं होता. मनुष्य को जोड़ने का काम शुद्ध सात्विक प्रेम से होता है हिंसा से नहीं. यहां ऊंच नीच कोई नहीं है. संघ इस भाव को पैदा करने की कोशिश में है. समावेशी व्यवस्था बनाए रखना संघ का काम है.
  8. धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति को लेकर पूछे गए सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू कहो या हिंदवी एक ही बात है. हिंदू मुस्लिम सब एक ही है. क्या बदली सिर्फ पूजा बदली है और कुछ नहीं. हमारा आइडेंटिटी एक ही है. हमारी संस्कृति, पूर्वज एक ही हैं. सिर्फ अविश्वास के चलते मन में शंका होता है दोनों तरफ. इस्लाम यहां है और यहां रहेगा ये हिंदू सोच है. दोनों धर्मों में ये कॉन्फिडेंस जगाना होगा. पहले भी कहा गया है कि रिलीजन बदलने से कौम नहीं बदलती. शहरों और रास्तों का नाम आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए. आप ये मत समझें कि हमने मुसलमानों के लिए बोला है. जो देशभक्त मुस्लिम हैं, उसके नाम पर रखना चाहिए. मुस्लमान को भी समझना होगा हम पूजा पद्धति से अलग हैं. जब ये भावना मुस्लिम समाज में पैदा हो जाएगा तो हिन्दू समाज तो भाईचारे के लिए सदा से राह देख रहा है.
  9. भारत बुद्ध का देश तो संघ युद्ध की बात क्यों करता है वाले सवाल पर भागवत ने कहा कि हम एक्सरसाइज कर रहे हैं तो किसी को पीटने के लिए नहीं कर रहे हैं. बाकी सब देश बुद्ध के नहीं हैं, वो युद्ध करेंगे. कम से कम अपने को बचाने के लिए शस्त्र तो चाहिए ना. सनातन राष्ट्र कहने से लोग कन्फ्यूज होते हैं, हिंदू राष्ट्र कहने से उन्हें तुरंत समझ में आता है.
  10. काशी और मथुरा में मंदिर बनाए जाने की मांग वाले सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि संघ किसी भी आंदोलन में शामिल नहीं होता. संघ एकमात्र राम मंदिर आंदोलन में सीधे तौर पर जुड़ा था. अब संघ किसी भी आंदोलन में शामिल नहीं होगा, लेकिन हमारे स्वयंसेवक जा सकते हैं.

Related Articles

Back to top button