बिजली तार की चपेट में आने से 6 साल के मासूम की मौत

गौरेला पेंड्रा मरवाही: मरवाही में एक दर्दनाक घटना हुई. 6 साल का बच्चा करंट की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया. जिसके बाद बच्चा बेहोश हो गया. कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई.
मवेशियों से फसल बचाने किसान ने लगाया था करंट: घटना मरवाही थाना क्षेत्र के करगीकला ग्राम पंचायत की है. शुक्रवार को दिहाड़ी मजदूरी का काम करने वाले लेस सिंह का 6 साल का बच्चा गीत सिंह घर के पास खेल रहा था. खेलते खेलते वह घर के पास स्थित एक खेत के पास चला गया. खेत मालिक ने अपनी फसल को मवेशियों से बचाने के लिए चारों ओर करंट का तार लगाया हुआ था. जिससे बच्चा झुलस गया और बेहोश हो गया.
बच्चे की मौत से परिजनों का बुरा हाल: परिजन आनन फानन में बच्चे को लेकर मरवाही के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद परिजनों का रो रोककर बुरा हाल है. पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है.
मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चन्देल का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है. शव को पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. मामले की जांच जारी है.
बीते दिनों करंट लगने की घटनाएं:
25 अगस्त: कबीरधाम में खेत में लगे करंट की चपेट में आने से बाप बेटे की मौत
24 अगस्त: बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यार्ड में खड़ी ट्रेन की सफाई के दौरान ठेका मजदूर को लगा करंट, इलाज के दौरान 28 अगस्त को मौत
15 अगस्त: पेंड्रा में खेत में लगे पंप को चालू करने के दौरान दो भाई करंट की चपेट में आए, 1 की मौत
1 अगस्त: कोरबा में खेत में लगे बिजली का तार लगने से हाथी की मौत
3 जुलाई: कोरबा में बल्ब का स्विच ऑफ करते समय करंट लगने से 11 साल के बच्चे की मौत
2 जुलाई: बलरामपुर में खेलने के दौरान करंट वायर लगने से 4 साल की बच्ची की मौत
करंट लगने पर क्या करें: बारिश के दिनों में ज्यादातक करंट लगने की घटनाएं बढ़ जाती है. ऐसे में सावधानी बरतें. लेकिन फिर भी यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो ये काम करें.
- बिजली बंद करें या तार हटाए- सूखी लकड़ी या डंडे से पीड़ित व्यक्ति को बिजली स्रोत से दूर करे
- इसके बाद तुरंत एंबुलेंस को बुलाएं
- एंबुलेंस के आने तक ये काम करे
- घायल व्यक्ति को सीधे छूने से बचे- कई बार करंट लगने से घायल व्यक्ति को छूने पर आपको भी करंट लग सकता है
- व्यक्ति की सांस और नब्ज जांचे
- सांस नहीं चलने पर CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) दें. इसमें पीड़ित की छाती दबाना और मुंह से मुंह में सांस दी जाती है
- एंबुलेंस आने पर तुरंत अस्पताल लेकर जाए





