February 24, 2026 6:08 pm
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छत्तीसगढ़

नवरात्र 2025: गरबा के जरिए मनेंद्रगढ़ में अजीमुद्दीन अंसारी दे रहे सामाजिक समरसता का संदेश

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: नवरात्रि का पर्व वैसे तो धार्मिक आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, लेकिन एमसीबी जिले के मनेंद्रगढ़ में यह पर्व साम्प्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश भी दे रहा है. मनेंद्रगढ़ में मुस्लिम समाज से आने वाले पूर्व पार्षद पिछले आठ वर्षों से माता रानी की सेवा में डांडिया रास का आयोजन करवाते आ रहे हैं. यह आयोजन नगर पालिका क्षेत्र के सरोवर मार्ग पर भाजपा के पूर्व पार्षद अजीमुद्दीन अंसारी करवाते हैं. हर साल नवरात्रि पर भव्य डांडिया रास होता है जिसमें इलाके की महिलाएं और बहनें शामिल होती हैं.

गरबा के जरिए सामाजिक समरसता का संदेश: अजीमुद्दीन अंसारी कहते हैं कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से सामाजिक संदेश जाता है कि हम सब मिलजुलकर यहां रहते हैं, हर त्योहार को मनाते हैं. इस आयोजन में न सिर्फ उनके वार्ड की महिलाएं और बेटियां बल्कि पूरे शहर से लोग उत्साह के साथ शामिल होते हैं. छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी गरबा और डांडिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. स्थानीय लोग उन्हें प्यार से “गुड्डा अंकल या डांडिया वाले” कहकर बुलाते हैं. डांडिया में शामिल होने वाली महिलाओं का कहना है कि यह आयोजन उनके लिए एक ऐसा मंच है, जहां वे अपनी कला और उमंग दोनों को खुलकर व्यक्त कर सकती हैं.

बंगाली समाज से जुड़ी महिलाएं होती हैं शामिल: इस आयोजन में बंगाली समाज की महिलाएं भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होती हैं और गरबा-रास को खास रंग देती हैं. नवरात्रि के नौ दिन तक यहाँ का माहौल उत्साह और भक्ति से सराबोर रहता है.

हर साल यहां डांडिया का आयोजन होता है. गुड्डा अंकल इसे बहुत अच्छे से करवाते हैं और हर बार यह और बेहतर होता जा रहा है: खुशबू दास, स्थानीय महिला

यहा डांडिया का आयोजन होने से हमें बहुत खुशी होती है. हर साल इसका इंतजार रहता है और पूरे परिवार के साथ हम शामिल होते हैं: पूजा, स्थानीय महिला

और जगहों पर एंट्री फी और तमाम सुविधाओं के नाम पर पैसे लिए जाते हैं. हम बिना किसी शुल्क के इस तरह का आयोजन करते हैं. यहां बेटियां और माताएं आती हैं गरबा खेलती हैं. हमें इस तरह का आयोजन कर बड़ा सुकून मिलता है: अजीमुद्दीन अंसारी, पूर्व पार्षद

प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा: अजीमुद्दीन अंसारी का मानना है कि नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का एक जरिया है. वे इसे हर साल और भव्य बनाने की कोशिश करते हैं ताकि हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

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