मरमेड बेबी का जन्म, विश्व में 1 लाख बच्चों में से एक में होता है ये सिंड्रोम

धमतरी: जिला अस्पताल धमतरी में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रागिनी सिंह ठाकुर ने इस घटना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 1 अक्टूबर को एक 28 साल की महिला डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल पहुंची. प्रसूता के गर्भ में बच्चे के आसपास थोड़ा भी पानी नहीं था.ऐसी स्थिति में महिला का तुरंत सिजेरियन किया गया. जिसके बाद जो बच्चा पैदा हुआ वह मरमेड सिंड्रोम (सिरेनोमेलिया) के साथ पैदा हुआ.
मरमेड सिंड्रोम क्या है: डॉक्टर रागिनी ने बताया कि शिशु के ऊपर का हिस्सा क्लियर था. आंख, नाक, हार्ट विकसित थे लेकिन रीड की हड्डी से नीचे का हिस्सा नहीं बना था. कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं था. जननांग भी नहीं बने थे. दोनों पैर फ्यूज होकर एक पूंछ की तरह बन गए थे. जो मरमेड टेल की तरह दिखता है, इस वजह से इसे मरमेड सिंड्रोम कहा जाता है. बच्चे का वजन लगभग 800 ग्राम था. बच्चा जब पैदा हुआ तो वह जिंदा था. उसे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जिससे वह 3 घंटे तक रहा, उसके बाद उसकी मौत हो गई.
ये रेयर बर्थ डिफेक्ट है. विश्व में लगभग 1 लाख बच्चों में 1 बच्चा मरमेड सिंड्रोम के साथ पैदा होता है- रागिनी सिंह ठाकुर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल धमतरी
मरमेड सिंड्रोम में बच्चे क्यों पैदा होते हैं: डॉक्टर रागिनी ने बताया कि इस तरह के बच्चे के पैदा होने का कोई निश्चित कारण नहीं बताया जा सकता. गर्भ धारण के दौरान कुछ ऐसी दवाईयां होती है जिन्हें लेने से ऐसा हो सकता है. डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने अपने अब तक के लाइफ में 2 बार ऐसे केस देखे हैं.
जानकारी के अनुसार ऐसा दुर्लभ केस अंतरराष्ट्रीय जनरल ऑफ रिप्रोडक्शन, गर्भनिरोधक, प्रसूति एवं स्त्री रोग के अनुसार वर्ष 1542 से अब तक 300 मामले ही हैं. वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश की एक महिला ने देश के पहले मरमेड सिंड्रोम बच्चे का जन्म दिया था. वह बच्चा भी सिर्फ 10 मिनट तक जीवित रहा.





