करवाचौथ व्रत का शुभकाल क्या है, कब दिखेगा चंद्रमा, जानिए सुहाग के पर्व की विधि

रायपुर: पति की लंबी आयु के लिए हर साल सुहागन महिलाएं करवा चौथ का व्रत करतीं हैं. करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार करवा चौथ की शुभ तिथि 10 अक्टूबर शुक्रवार के दिन पड़ रही है. करवा चौथ व्रत में महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण करतीं हैं. करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु और परिवार की उन्नति के लिए किया जाता है.
कब होंगे चांद के दर्शन, क्या है करवाचौथ का शुभकाल ?: ज्योतिष एवं वास्तुविद पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया कि करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करती है. करवा अर्थात कर्क का बड़ा महत्व माना गया है. करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने व्रत का पारण करती है. आज के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला निराहार और कठिन व्रत करती हैं. करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. ऐसे में चंद्रमा करवा चौथ के दिन आसमान में शाम को 6:08 से संध्या 7:20 तक दिखाई पड़ेगा और इसी समय को शुभ समय माना गया है.
कैसे होती है करवाचौथ व्रत की पूजा ?: करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला और निराहार कठिन व्रत करती हैं, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी भारतीय सनातन स्त्रियों और पुरुषों के लिए बहुत खास होती है. खासकर पंजाब, दिल्ली इन क्षेत्र में इसकी ज्यादा महत्ता है. महिलाएं सास के द्वारा दी गई सरगी जिसमें सूखे मेवे, चावल इत्यादि होते हैं. इसे सूर्योदय से पहले स्नान करके आहार के रूप में लेकर संकल्प करती हैं.
करवाचौथ व्रत के उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री: करवा चौथ व्रत में लगने वाली सामग्री के बारे में जानिए
- मिट्टी का करवा: यह पूजा का मुख्य पात्र होता है जो जल से भरा जाता है.
- छलनी: चंद्रमा को देखने और पति से आशीर्वाद लेने के लिए इसका उपयोग होता है.
- दीपक और कपूर: देसी घी का दीपक जलाया जाता है और कपूर से आरती की जाती है.
- रोली कुमकुम और चंदन: तिलक लगाने के लिए रोली कुमकुम और चंदन का उपयोग किया जाता है.
- अक्षत: धार्मिक कार्यों में उपयोग होने वाले चावल.
- हल्दी और मौलीधागा: पूजा के दौरान देवी देवताओं को अर्पित करने और करवे पर बांधने के लिए इस्तेमाल होता है.
- फूल फल और मिठाई: पूजा में चढ़ने के साथ ही प्रसाद के काम में आता है.
- सुहाग का सामान: जिसमें 16 श्रृंगार, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, पाउडर जैसी तमाम चीजें शामिल होती है.
- पानी का लोटा: चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए इसमें शुद्ध जल भरना होता है.
- रुई की बत्ती और अगरबत्ती: दीपक जलाने और वातावरण को सुगंधित करने के लिए इस्तेमाल होता है.
पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने बताया कि इस बार करवाचौथ के व्रत में शाम को 6:08 से संध्या 7:20 तक चांद दिखाई पड़ेगा. सुहागिन महिलाएं इस समय में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण कर सकती हैं.





