March 7, 2026 9:20 pm
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छत्तीसगढ़

उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख: बीमा कंपनी की चालबाजी फेल, पीड़ित को 29 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

रायपुर: सूरजपुर निवासी निशांक शुक्ला के ट्रक में बीमा अवधि के दौरान बसंतपुर घाट (जिला बलरामपुर) में उतरते समय अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ. चिंगारी ने देखते ही देखते पूरे वाहन को आग की लपटों में बदल दिया.ट्रक पूरी तरह जल गया और लाखों का नुकसान हो गया.

बीमा कंपनी ने दावा ठुकराया, दिया तर्क “परमिट समाप्त”: परिवादी ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के समक्ष दावा पेश किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि वाहन का नेशनल परमिट ऑथराइजेशन समाप्त हो गया था. इसके बाद परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग अंबिकापुर का दरवाजा खटखटाया.

Chhattisgarh Consumer Commission

जिला आयोग ने दी आंशिक राहत , 75% भुगतान का आदेश: जिला आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर आंशिक राहत दी और वाहन क्षति का 75% यानी ₹15.81 लाख भुगतान का आदेश सुनाया. लेकिन ट्रक मालिक निशांक शुक्ला ने इसे अधूरा न्याय बताते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की.

राज्य आयोग ने कहा- बीमा कंपनी की गलती, सेवा में कमी साबित: राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चैरेडिया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने कहा- “वाहन का नेशनल परमिट छत्तीसगढ़ में वैध था. दुर्घटना भी राज्य की सीमा के भीतर हुई, इसलिए अलग से ऑथराइजेशन की जरूरत नहीं थी. बीमा कंपनी ने गलत आधार पर दावा खारिज कर उपभोक्ता के साथ अन्याय किया.”

Chhattisgarh Consumer Commission

राज्य आयोग का सख्त आदेश: आयोग ने जिला आयोग का आदेश संशोधित करते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि परिवादी को कुल ₹29,05,500/- (₹1,500 घटाकर) का भुगतान किया जाए. राशि पर 6% वार्षिक ब्याज (22 नवंबर 2024 से) लगाया जाएगा. 45 दिनों में भुगतान न होने पर ब्याज दर बढ़कर 8% हो जाएगी. साथ ही ₹5,000 वाद व्यय भी परिवादी को देना होगा.

उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बना फैसला: यह निर्णय उपभोक्ताओं के हक में ऐतिहासिक माना जा रहा है. आयोग ने साफ कहा “बीमा कंपनी उपभोक्ता के साथ मनमानी नहीं कर सकती अगर वाहन संपूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है, तो बीमित राशि का पूर्ण भुगतान अनिवार्य है.”

संदेश साफ — उपभोक्ता अधिकारों से कोई खिलवाड़ नहीं!: राज्य आयोग के इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीमा कंपनियां अब नियमों की आड़ में दावे खारिज नहीं कर पाएंगी. उपभोक्ता यदि ठोस तथ्य और साक्ष्य के साथ न्यायालय जाए, तो न्याय जरूर मिलेगा.

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