छात्र अधिकार पदयात्रा का अंतिम दिन आज, JLKM नेता देवेंद्र महतो बोले- यह यात्रा छात्रों की आवाज को मजबूत करेगी

रांची: छात्र हितों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर आयोजित 6 दिवसीय छात्र अधिकार पदयात्रा आज अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गई है. 20 किलोमीटर की यह पदयात्रा मंगलवार सुबह बूटी मोड़ से शुरू हुई, जिसकी अगुवाई जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं.
पदयात्रा की शुरुआत में बड़ी संख्या में छात्र, युवा प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और JLKM से जुड़े लोग मौजूद थे. सभी प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और नारे लिखी तख्तियां लेकर शिक्षा सुधार, रोजगार के अवसर और छात्रों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया.
कई मार्गों से गुजरती हुई पहुंचेगी विधानसभा
आज की यह अंतिम चरण की पदयात्रा बूटी मोड़ से आगे बढ़ते हुए बरियातू, रेडियम रोड, रातू रोड, अरगोड़ा चौक, बिरसा चौक सहित शहर के प्रमुख इलाकों से गुजरी. पूरे मार्ग में प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक है. कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने भी पदयात्रा में शामिल होकर छात्रों के मुद्दों के समर्थन में अपनी आवाज मिलाई.
पदयात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और युवाओं ने कहा कि शिक्षा का विकास सिर्फ सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से भी संभव है. इस यात्रा का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को सरकार तक पहुंचाना और छात्रों के अधिकारों को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा करना है.
यात्रा छात्रों की आवाज को मजबूत करेगी: देवेंद्र महतो
पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं को उजागर करने का एक बड़ा अभियान है. उन्होंने कहा कि आज भी कई छात्र आर्थिक, संरचनागत और नीतिगत चुनौतियों से जूझ रहे हैं. यह पदयात्रा सरकार और प्रशासन को संदेश देने के लिए है कि छात्रों के मुद्दों को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता. शिक्षा और रोजगार को लेकर निर्णायक कदम उठाना समय की मांग है.
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह यात्रा कई गांवों, कस्बों और शहरी इलाकों से गुजरते हुए छात्रों व युवाओं की भावनाओं को एकजुट करने का माध्यम बनी है. पदयात्रा के दौरान मिली प्रतिक्रिया से साफ है कि छात्र हितों को लेकर समाज में गंभीरता बढ़ रही है.
विधानसभा परिसर में होगा समापन
जानकारी के मुताबिक इस पदयात्रा का परमिशन पुराने विधानसभा तक का ही मिला है. छात्र अधिकारों को लेकर यह पदयात्रा फिलहाल राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है. माना जा रहा है कि इससे आने वाले दिनों में शिक्षा नीतियों पर गंभीर बहस को बढ़ावा मिलेगा.





