April 3, 2026 8:29 pm
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मनरेगा नाम बदलने पर कांग्रेस का बड़ा हमला! ‘फंड खत्म, तो अधिकार खत्म’, कहा- यह राज्यों और मजदूरों के हितों पर सीधा वार

कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-GRAMG) किए जाने का पुरजोर विरोध किया है. पार्टी ने कहा है कि यह सिर्फ नाम ही नहीं बदला जा रहा है, असल में मोदी सरकार ने काम के अधिकार की गारंटी वाले इस कानून को बदलकर उसमें शर्तें और केंद्र का नियंत्रण बढ़ा दिया है जो कि राज्यों और मजदूरों दोनों के खिलाफ है.

पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा है कि वो MGNREGA जो ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ, जिसने गांव-देहात में लोगों को काम का अधिकार दिया, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत की अब उसे पूरी तरह से तबाह किया जा रहा है. यह पूरी तरह से अनस्किल्ड मजदूरों के लिए स्कीम थी, जिसका बजट केंद्र सरकार देती थी.

कांग्रेस बोली- दो हिस्सों में बदल जाएगा बजट

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कानून में बदलाव के बाद मनरेगा बजट का 60 फीसदी भार केंद्र सरकार और 40 फीसदी भार राज्य सरकारों को उठाना पड़ेगा. एक तरह से यह राज्यों के राजस्व पर भी हमला है. इसका दुरुपयोग विपक्ष की राज्य सरकारों के खिलाफ भयंकर रूप से किया जाएगा. इस न्यू इंडिया में पैसों का भुगतान राज्य करेंगे और प्रधानमंत्री फोटो खिंचवाएंगे.

पार्टी ने कहा है कि मनरेगा मांग पर आधारित एक योजना थी, लेकिन अब शर्तें लागू हो जाएंगी. स्कीम के तहत अगर कोई मजदूर काम मांगता था, तो केंद्र को उसे काम देकर उसका भुगतान करना पड़ता था. बदली हुई स्कीम में डिमांड के आधार पर काम नहीं मिलेगा. अब काम केंद्र के पूर्व-निर्धारित मानक और बजट आवंटन के आधार पर ही मिलेगा. फंड खत्म, तो अधिकार खत्म. अगर फंड से ज्यादा काम दिया तो उसका भुगतान राज्य सरकार को करना होगा.

‘ग्राम सभाओं और पंचायतों का किया जाएगा दरकिनार’

कांग्रेस ने कहा है कि ग्राम सभाओं और पंचायतों को दरकिनार किया जाएगा. अभी तक मनरेगा में काम ग्राम सभाओं और पंचायतों के जरिए होता था, लेकिन नई स्कीम में GIS Tools, PM Gati Shakti और केंद्र के डिजिटल नेटवर्क अनिवार्य हैं. स्थानीय प्राथमिकताएं अब विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से फिल्टर होंगी. इसमें बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग, डैशबोर्ड्स और AI ऑडिट जरूरी हैं.

सरकार काम को रोककर मजदूरों को निजी खेतों में मजदूरी के लिए धकेलना कल्याण नहीं बल्कि सरकार द्वारा मजदूरों की सप्लाई है जो उनसे उनकी आय, उनकी इच्छा और सम्मान सब छीनती है. असल में नई स्कीम का मतलब केंद्र सरकार का कंट्रोल है. अब राज्यों को खर्च के लिए मजबूर किया जाएगा. मजदूरों के अधिकारों को कम करके उस पर शर्त लगा दिया जाएगा. हर बार की तरह इस बार भी यह कानून गरीब विरोधी है.

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